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गरीबों की जेब पर डाका; रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर पर ताला, निजी संस्थानों से जांच कराने की मजबूरी

गरीबों की जेब पर डाका; रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर पर ताला, निजी संस्थानों से जांच कराने की मजबूरी

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गरीबों की जेब पर डाका; रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर पर ताला, निजी संस्थानों से जांच कराने की मजबूरी

शहडोल अस्पताल सहित निजी संस्थानों से जांच कराने की मजबूरी, प्रसव पीडि़ता माताओं की बढ़ी परेशानी
अनूपपुर। जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल परिसर में मरीजों को सोनोग्राफी जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। हाल के दिनों में जिला अस्पताल से सेवानिवृत्त हुए रेडियोलॉजिस्ट की जगह अन्य की भर्ती नहीं किए जा सके हैं। जहां रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में पिछले दो सप्ताह से जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर पर ताला लगा हुआ है। सोनाग्राफी सेंटर के अभाव में मरीजों को जांच के लिए शहडोल जिला अस्पताल या फिर निजी संस्थानों की ओर रूख करना पड़ रहा है। जिसमें मरीजों को नि:शुल्क की जगह मोटी रकम चुकाना पड़ रहा है। वहीं गम्भीर हालत में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली माताओं को भी बिना सोनोग्राफी जांच के ही डॉक्टरों को प्रसव कराने की मजबूरी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि अगर जिला अस्पताल के यही हालात बने रहे तो फिर से गरीब परिवार अपने मरीजों के उपचार के जिला अस्पताल आने से दूरी बना लेंगे। बताया जाता है कि ३१ जुलाई को सोनोग्राफी सेंटर के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गुप्ता सेवानिवृत्त हो गए। इसकी सूचना दो माह पूर्व ही जिला अस्पताल प्रशासन को दे दी गई, जिसमें जिला अस्पताल द्वारा सोनोग्राफी प्रभावित होने की जानकारी देते हुए शासन को जानकारी भेजी गई। लेकिन आलम है कि २० दिनों बाद भी जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर का दरवाजा नहीं खुला है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार रोजाना जिला अस्पताल में उपचार के लिए २५०-३०० आईपीडी और ओपीडी मरीज आते हैं। जिसमें अधिकांश पेट ब्याधियों से सम्बंधित और प्रसव पीडि़त माताएं शामिल होती है। इसमें पेट सम्बंधी विशेष समस्याओं पर डॉक्टरों द्वारा सोनोग्राफी को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जबकि प्रसव पीडि़त माताओं के अंतिम सोनोग्राफी रिपोर्ट के सहारे लेबर रूम डॉक्टरों द्वारा प्रसव कराया जाता है। लेकिन अब सोनोग्राफी तत्काल नहीं हो पाने के कारण डॉक्टरों की मुसीबत बढ़ गई है।
बॉक्स: शहडोल का सफर खतरनाक
प्रसव पीडि़त माताओं का सोनोग्राफी के लिए बस या अन्य निजी वाहनों से शहडोल जाना खतरनाक है। अंत की स्थिति में वाहनों से यात्रा करना किसी गड्ढे के झटके या फिर जर्क पेट में पल रहे नौनिहाल के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जच्चा सहित बच्चे की भी जान जा सकती है।
वर्सन:
इसकी जानकारी स्वास्थ्य संचालनालय को भेजी जा चुकी है। रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी सेंटर बंद है, इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
डॉ. आरएस परस्ते, सिविल सर्जन जिला अस्पताल अनूपपुर।