
गंभीर नहीं प्रशासन, अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए छह तालाब
अनूपपुर।अनूपपुर नगरपालिका अंतर्गत 20 तालाबों को संरक्षित करने के प्रति नगरीय व जिला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा है। जिले में दो बड़े तालाबों के साथ ही 18 छोटे तालाब हैं, जिनमें जल भराव का काम भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है। प्रशासन की अनदेखी का शिकार हुए अधिकांश तालाबों का सीमांकन भी अभी तक नहीं हो सका है। जबकि इन तालाबों पर खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है और अब यह तालाब किसी रहवासी भूखंड की तरह नजर आ रहे हैं। जबकि कुछ तालाबों को मत्स्य पालन के लिए लीज पर दिया गया है, पर इन तालाबों में मछली पालन की जगह गंदगी अधिक हो गई है। जिसके कारण वॉटर रिचार्जिंग सिस्टम की स्थिति बंद हो गई है। हालात यह है कि नगर के ये समस्त तालाब अब अपना अस्तित्व भी नहीं बचा पा रहे हैं और परिणाम यह है कि अब यह पूरी तरह से सूख चुके हैं।
नगरीय प्रशासन की सबसे अधिक लापरवाही
बावजूद नगरपालिका और जिला प्रशासन उसे बचाने पहल नहीं कर रहा है। जानकारों का मानना है कि इसमें सबसे अधिक नगरीय प्रशासन की लापरवाही रही, जिसने तालाबों के संरक्षण के लिए कभी पहल नहीं की। यहंा तक राजनीति का लाभ लेते हुए कुछ तालाबों को अप्रत्यक्ष रूप में अतिक्रमण के हवाले कर दिया। जिसका खामियाजा आज अनूपपुर नगरवासियों को झेलना पड़ रहा है, जहां पांडवकालीन और कल्चुरी कालीन प्राचीन ऐतिहासिक तालाबें जो सालोंभर पानी से लबालब रहा करती थी आज समतल मैदान नजर आ रही है। जलस्तर कम होने के कारण नगर की हैंडपम्पों से पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं उगल रहा है। नगरपालिका सीएमओ यशवंत वर्मा का कहना है कि नगर की तालाबों को संरक्षण करने आजतक इसके सीमांकन नहीं किए गए हैं। जिला बने 16 साल बीत चुके हैं लेकिन आजतक राजस्व विभाग ने इसका सीमांकन नहीं किया है। सीमांकन के अभाव में तालाबों की मेंढ अतिक्रमण की चपेट में आ गई है। मेढ पर मकान बन जाने के कारण बारिश का पानी तालाब तक नहीं उतर पा रहा है। तालाबों के सौंन्दर्यीकरण करने परिषद के बाद विशेष बजट नहीं होता है। इसकी अनदेखी के कारण भी तालाबें अस्तित्वहीनता का कारण बनी है।
परिवारों ने पट्टे तहत शासकीय जमीनों को अपने नाम कर लिया है
जानकारी के अनुसार अनूपपुर नगरीय क्षेत्र की 20 तालाबों में 6 तालाब अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है। यहां मेढों पर बसे परिवारों ने वनाधिकार पट्टे के तहत शासकीय जमीनों को अपने नाम कर लिया है। जहां ईंट के पक्के मकान के साथ साथ शौचालयों के नालों का मुख भी तालाब की ओर खोल दिया है। अतिक्रमण की चपेट में वार्ड क्रमांक 14-15 स्थित रानीतालाब, वार्ड क्रमांक 11 स्थित उंजीर तालाब, वार्ड क्रमांक 10 स्थित देवमांग तालाब, वार्ड क्रमांक 10 चमरूगोथी तालाब, वार्ड क्रमांक 10 बोकरा तालाब, तथा वार्ड क्रमांक 10 स्थित ही सोहारी तालाब है, जिनकी मेढ सहित आसपास की जमीनों को पट्टे के रूप में रहवासियों को प्रदान कर दिया गया है। जबकि 14 अन्य तालाब जिसे मत्स्य विभाग द्वारा लीज के आधार पर उत्पादकों को प्रदान की। लेकिन आश्चर्य मत्स्य पालन के लिए दिए गए लीज में लाखों के राजस्व आवक होने के बाद भी उसके सौंन्दर्यीकरण के लिए पहल करने से नगरीय प्रशासन ने दूरी बना रही है।
सीमांकन के लिए सीएमओ भेजें तो प्रस्ताव
एक ओर नगरीय प्रशासन तालाबों के संरक्षण से पल्ला झाड़ सीमांकन नहीं होने की दुहाई देते हुए राजस्व विभाग पर नाकामी का ठिकरा फोड़ रहा है। वहीं अनुविभागीय राजस्व अधिकारी नदीमा शीरी का कहना है कि सीमांकन के लिए सीएमओ प्रस्ताव तो भेजे। प्रस्ताव के साथ ही उसपर अमल किया जाएगा, जल संकट की समस्या से अनूपपुर जूझ रहा है, इसके लिए जरूरी है सबसे पहले क्षेत्र की तालाबों को जलसंरक्षण युक्त बनाया जाए।
पांच पेड़ लगाए तभी मिलेगी बोर की अनुमति
शासन के निर्देश में जून तक बिना प्रशासकीय अनुमति बोर नहीं करने तथा जरूरतों के अनुसार विभाग में पहुंच रहे आवेदन पर अब एसडीएम अनूपपुर ने एक अनूठी पहल की है। बोर की अनुमति मांगने वाले अति जरूरतमंद आवेदकों से पांच फलदान पौधे लगाने तथा उसके सरंक्षण के दिए शपथ के बाद अनुमति प्रदान का सर्कुलर जारी किया है। उनका कहना है कि आवेदक अपने घर के पास पांच पौधे लगाकर उसके फोटो के साथ शपथ देगा तभी बोर की अनुमति प्रदान की जाएगी।
इनका कहना है
नगरीय प्रशासन ने आजतक सीमांकन के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है। पहले सीएमओ आवेदन तो करें तत्काल ही सीमांकन की कार्रवाई की जाएगी। नगरीय क्षेत्र की तालाबें सूख गई है, जलसंकट बन आया है। इसके लिए जरूरी है कि बारिश के पानी को संरक्षित किया जाए।
नदीमा शीरी, एसडीएम, अनूपपुर
Published on:
11 Jun 2019 02:23 pm
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