
गिद्ध परिवारों का बढ़ा कुनबा, जिले में विभिन्न प्रजाति के 255 गिद्ध
अनूपपुर। शिकार पक्षियों की श्रेणी में आने वाली मुर्दाखोर पक्षा गिद्धों के कुनवें में इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में ७५ की संख्या में वृद्धि हुई है। यह विलुप्त होती प्रजाति के पक्षियों में राहत की खबर है। रविवार ७ फरवरी को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गिद्धों की गिनती की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसमें सुबह ६ से ८.३०-९ बजे तक वनविभाग अमले द्वारा उनके रहवासी क्षेत्रों में की गई गिनती में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। वनमंडल कार्यालय अनूपपुर एसडीओ ओजी गोस्वामी ने बताया कि यह खुशी वाली जानकारी आई है। जिसमें सुबह घोंसलों के बाहर, धूप लेते गिद्धों के परिवारों की गिनती में २५५ गिद्धों का गिनती सामने आई है। जिले के दो मुख्य वनपरिक्षेत्रों में गिद्धों का रहवास क्षेत्र माना जाता है। इनमें अनूपपुर वनपरिक्षेत्र के बड़हर, जमुड़ी बीट तथा राजेन्द्रग्राम वनपरिक्षेत्र के अहिरगवां बीट क्षेत्र है। अनूपपुर वनपरिक्षेत्र के बड़हर, छीरापटपर, जमुड़ी में ५ गिद्ध पाए गए हैं। जबकि अहिरगवां बीट क्षेत्र में २५० से अधिक गिद्धों की संख्या पाई गई। इसके अलावा खजहाई, छुईहाई, नाकीघाट, मुरना में भी गिद्धों के परिवार पाए गए हैं। जिसमें पूरी गिनती में २५५ कुल गिद्ध नजर आए हैं। ये सभी बैठे हुए गिद्ध की संख्या है। इनमें ७३ बच्चे, १८२ व्यस्क हैं। तथा ८३ घोंसले पाए गए हैं। ये अपना रहवास किसी उंचे पेड़ या खड़ी पहाडिय़ों के चट्टानों के खोह वाले स्थान में घोंसला बनाते हैं। बताया जाता है कि गिद्ध परिवार को दो भागों में बांटा जा सकता है। इसमें एक अमरीका के कॉण्डर किंग वल्चर, कैलिफोर्नियन वल्चर, टर्की बजर्ड़, और अमरीकी ब्लैक वल्चर जबकि दूसरे भाग में अफ्रीका और एशिया के राजगिद्ध, काला गिद्ध, चमर गिद्ध, बड़ा गिद्ध, गोबर गिद्ध पाए जाते हैं।
बॉक्स: पिछले वर्ष की तुलना में ७५ गिद्धों की बढ़ी संख्या
वनविभाग की जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष २०२०-२१ में लगभग ७५ अधिक गिद्ध पाए गए हैं। पिछले वर्ष १८० गिद्ध पाए गए थे। एसडीओ ओजी गोस्वामी बताते हैं कि गिद्ध दीर्घायु होते हैं लेकिन कम समय में यह प्रजनन करते हैं, जिसके कारण गिद्ध ५ वर्ष की आयु में प्रजनन की अवस्था में आते हैं। एक बार में एक से दो अंडे देते हैं। यदि परभक्षी इनके अंडे खा जाते हैं तो यह अगले साल तक प्रजनन नहीं करते हैं। यही कारण है कि भारतीय गिद्ध अभी भी अपनी आबादी बढ़ा नहीं पा रहा है। जिले में राजगिद्ध, काला गिद्ध (सिनेरियस), यूरेशियन ग्रिफन, हिमालयन ग्रिफन गिद्ध नहीं पाए जाते हैं।
बॉक्स: कहां कौन गिद्ध
प्रजाति अव्यस्क व्यस्क
इंडियन/ लोंग विल्ड गिद्ध१० १३
सफेद पीठ ५८ १६५
सफेद गिद्ध ०५ ०४
वर्सन:
गिनती के लिए एक दिन निर्धारित किया गया था, जिसमें अबतक २५५ गिद्ध बैठे नजर आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ७५ नए सदस्यों की बढोत्तरी हुई है।
ओजी गोस्वामी, एसडीओ वनमंडल अनूपपुर।
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Published on:
08 Feb 2021 11:10 am
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