
ये क्या: भृत्य के भरोसे संचालित नगरीय लाईब्रेरी, लाखों खर्च बाद भी हो गई वीरान
रख-रखाव में लाइब्रेरी से पाठक बना रहे दूरी, उपलब्ध संसाधन भी हो रहे बर्बाद
अनूपपुर। नगरपालिका अनूपपुर क्षेत्र में स्थानीय लोगों व छात्रों के लिए एक छत के नीचे दैनिक जानकारियों के साथ शिक्षा जगत से जुड़ी ज्ञान उपलब्ध कराने पूर्व नपाध्यक्ष भाईलाल पटेल एवं उनकी परिषद् द्वारा वर्ष 1984 में विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. पंडित शंभूनाथ शुक्ल के नाम से संचालित अनूपपुर पब्लिक लाइब्रेरी अब वीरनी में खोती नजर आ रही है। समाचार पत्र- पत्रिकाओं के साथ रोजगार से सम्बन्धित जानकारियां पाठकों तक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित लाइब्रेरी से पाठक अब दूरी बना रहे हैं। जहां कभी आधा सैकड़ा से अधिक लोगों की जुटने वाली भीड़ एकाध पाठकों तक सीमित होकर रह गई है। इसका मुख्य कारण ४ लाख की लगात से नई व्यवस्थाओं में संचालित कराई गई लाईब्रेरी नगरीय प्रशासन की अनदेखी में बदहाल हो गई है। जहां ग्रंथालय की जगह लाईब्रेरी की जिम्मेदारी अब भृत्यों के कंघों पर लाद दी गई है। यहीं नहीं एक भृत्य अपनी जिम्मेदारी भी दूसरी भृत्य पर सौंप लाईब्रेरी की बदहाली में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बताया जाता है कि लाइब्रेरी प्रारभ्भ में सामुदायिक भवन के अन्दर अलग से बनाएं कक्ष से आरम्भ हुई थी। लेकिन बाद में स्वयं के भवन में स्थापित हुई। भवन के प्रथम तल पर लाईब्रेरी तथा नीचे दुकान तथा उपर लाईबे्ररी बनी हुई है। लाइब्रेरी का संचालन दोनों समय किया जाता था और लाईब्रेरी में दीपावली, होली को ही अवकाश के रूप में बंद रखा जाता है, शेष दिन पाठकों के लिए लाइब्रेरी के द्वार खुले रहते थे। जिसमें नियमित 250-300 पाठक लाइब्रेरी के बने। यहीं नहीं लगभग तीस हजार रूपए प्रतिवर्ष की पत्रिका, समाचार पत्र हर तरह के आते रहे। लेकिन देखभाल के अभाव में अब यह पब्लिक लाइब्रेरी पूरी व्यवस्था चौपट हो गई। पूर्व ग्रंथपाल के अनुसार पब्लिक लाइब्रेरी को जिला लाइब्रेरी बनाने के लिए कलेक्टर को पत्र भी लिखा था। लेकिन सेवानिवृत्ति के उपरांत यह प्रस्ताव भी दब गए।
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Published on:
7 Jul 2018, 9:43 PM IST
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