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ये क्या?…बारिश से जलमग्न हुए दो सरकारी कार्यालय: नापतौल विभाग कार्यालय में घुसा पानी, गेट पर लटका ताला

ये क्या?...बारिश से जलमग्न हुए दो सरकारी कार्यालय: नापतौल विभाग कार्यालय में घुसा पानी, गेट पर लटका ताला

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What is this? ... two government offices submerged by rain: waterfall

ये क्या?...बारिश से जलमग्न हुए दो सरकारी कार्यालय: नापतौल विभाग कार्यालय में घुसा पानी, गेट पर लटका ताला

पानी के बीच कर्मचारी पहुंच रहे खनिज विभाग, ठेकेदार सहित अन्य की बढ़ी मुसीबत
अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर में शासकीय विभागों को सोननदी किनारे स्थापित करने की औनी पौनी तैयारियों ने लाखों की शासकीय विभागों को पानी के बीच धकेल दिया है। संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर के बगल उखड़-खाबड़ गड्ढों के बीच बनाई गई जिला खनिज विभाग और जिला नापतौल विभाग पिछले दिनों से लगातार हो रही बारिश की पानी में अब चारो तरफ से धिर गया है। दोनों कार्यालय के चारों ओर गहरा पानी भरा हुआ है, जो आसपास के स्थानों से बहकर कार्यालयों के गड्ढों में भर रहा है, जिसके कारण दोनों कार्यालय तक पहुंचने के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं हैं। खनिज विभाग अधिकारी व कर्मचारी कम पानी के कारण पानी के बीच पैदल कार्यालय पहुंचने की विवशता है, जबकि जिला नापतौल विभाग कार्यालय तक पहुंचने कोई मार्ग ही नहीं है। यहां अधिक पानी भराव के कारण कार्यालय में पानी घुस गया है। जिसके कारण कार्यालय पर अब ताला लटका हुआ है। पीडब्ल्यूडी विभाग की जानकारी के अनुसार वर्ष २०१० में नापतौल विभाग कार्यालय के भवन का निर्माण संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनाए जाने की प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन भूमि की कमी के कारण बाद में इसे संयुक्त कलेक्ट्रेट कार्यालय के समीप ही भूमि आवंटित कर दी गई और लोक निर्माण विभाग द्वारा २५ लाख २४ हजार की लागत से वर्ष २०१२ में जिला नापतौल का प्रयोगशाला सह कार्यालय के रूप में बनाया गया। जिसमें २८ जुलाई २०१४ को नए भवन में इस कार्यालय का संचालन किया गया। लेकिन ४ वर्ष बीत जाने के बाद इस भवन तक न तो सडक़, पानी तथा ना ही बाउंड्रीवॉल की सुविधा बनाई गई। जबकि वर्ष २०१२-१३ के दौरान ही लगभग १८ लाख की लागत से जिला खनिज विभाग भवन का निर्माण कराया गया। जिसमें वर्ष २०१४ के दौरान ही कार्यालय संचालन की व्यवस्था बनाई गई। विभागीय अधिकारियों का कहना हैै कि वर्ष २०१४ से कलेक्ट्रेट परिसर से सटे संचालित जिला खनिज विभाग और जिला नापतौल विभाग के लिए सुविधायुक्त मार्ग की व्यवस्था नहीं बनाई गई है। जिसके कारण पिछले चार सालों से फुटपाथ जैसे रास्ता से खनिज विभाग तक लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर नंद कुमारम् ने नापतौल विभाग के कार्यालय तक आसान पहुंच रास्ता बनाने के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय के पूर्वी हिस्से की दीवाल से ही एक छोटा सा रास्ता बनवा दिया था। लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों को लेकर पुन: दीवार तोडक़र बनाए गए मार्क को बंद कर दिए गए हैं।
खनिज विभाग अधिकारी के अनुसार गहरे गड्ढों के कारण जिला प्रशासन ने वर्ष २०१५ में खनिज विभाग तथा नापतौल विभाग के बीच बने गड्ढे को त्योहारों के दौरान प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अस्थायी कुंड का निर्माण करवा दिया। जिसमें प्रतिवर्ष इसी कुंड में गणपति, दुर्गा, काली तथा अन्य प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला नापतौल विभाग कार्यालय में एक निरीक्षक, एक सहायक ग्रेड ३ तथा श्रम सहायक ही पदस्थ है। जिले के चारो विकासखंड से पहुंचने वाले व्यापारी अपने कांटा, बांट का सत्यापन करने के लिए जिला नापतौल विभाग कार्यालय तो पहुंचते है लेकिन रास्ता न होने तथा कार्यालय के सामने बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण उन्हें पहुंचने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। जबकि खनिज विभाग में सात पदाधिकारी व कर्मचारी पदस्थ है। नापतौल विभाग अधिकारी का कहना है कि हमने नियंत्रक मापतौल विभाग भोपाल के उच्चाधिकारियो से जिला नापतौल कार्यालय के लिए स्थाई मार्ग, बाउंड्रीवॉल, पानी तथा चौकीदार की मांग पत्र लिखकर की है, लेकिन अब तक इस संबंध में किसी भी तरह के दिशा-निर्देश नहीं दिए गए है।
वर्सन:
दोनों कार्यालय पानी में भर गए हैं। फिलहाल किसी प्रकार पानी पम्प कर बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा, जहां पानी होने पर रास्ते के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी। नापतौल विभाग पूरी तरह से पानी से धिरा हुआ है। इसके लिए भी प्लानिंग की जाएगी।
अनुग्रह पी, कलेक्टर अनूपपुर।