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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए

-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए

शिक्षकों ने प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के नाम जिला शिक्षाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

अशोकनगर. भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका महासंघ ने एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर राहुल गुप्ता को सौंपा। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग सहित अन्य मांगे रखी गई हैं।


मजदूर संघ के हैरी रघुवंशी ने बताया कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा पूरे देश में वर्ष 1975 से आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन हो रहा है। जिनमें 25 लाख से भी अधिक आंगनबाड़ी कर्मी कार्यरत हैं। इनके जिम्मे 0 से 6 वर्ष की आयुवर्ग के बच्चों के पोषण एवं प्राथमिक स्वास्थ्य की देखभाल, अनौपचारिक शिक्षा के साथ पूरक आहार उपलब्ध कराने, शिशु एवं स्तनपान, गर्भवती माताओं को कुपोषण से बचाने के लिए काम किया जाता है।

इसके अलावा राज्य शासन के द्वारा बीएलओ, जनगणना, आर्थिक जनगणना, पल्स पोलियो, फाइलेरिया, राशनकार्ड सत्यापन, ओडीएफ आदि कार्य भी उनसे करवाए जा रहे हैं। लेकिन उन्हें आज तक न ही सरकारी कर्मचारी घोषित किया गया है और न ही न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जा रहा है। इस दौरान रामवीर रघुवंशी, महेंद्र शर्मा, सीमा श्रीवास्तव, रेखा जोगी, सरस्वती तिवारी, ममता केवट, गायत्री मिश्रा, रुखसाना बेगम, सुनीता रघुवंशी, सुनीता विश्वकर्मा, खेमराज पाल, विजय रघुवंशी, गायत्री शर्मा, अनुराधा ओझा आदि उपस्थित रहे।


ये रखी मांगे
- कार्यकर्ता को 18000 और सहायिका को 9000 प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए।
- मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता को भी बड़े केन्द्र की कार्यकर्ता के समान वेतन दिया जाए।
-आंगनबाड़ी कर्मियों को भी सामाजिक सुरक्षा के तहत जीपीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जाए।
- मासिक रिपोर्ट ऑनलाइन भेजने का खर्च दिया जाए।
- कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को उम्र का बंधन हटाते हुए वरीयता के आधार पर शत प्रतिशत पदोन्नत किया जाए।
- वर्तमान में देय मानधन एवं पोषाहार राशि का भुगतान एवं केन्द्र का किराया प्रतिमाह समय पर किया जाए।
- दुर्गम एवं कठिन क्षेत्रों में पदस्थ कर्मियों को कठिनाई भत्ता दिया जाए।

सालभर से क्रमोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
12 साल की सर्विस के बाद शिक्षकों को क्रमोन्नति नहीं मिली है। सालभर से क्रमोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों में आक्रोश है। सोमवार को क्रमोन्नति व अन्य मांगो को लेकर शिक्षकों ने प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के नाम जिला शिक्षाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।


राज्य अध्यापक संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष दिलीप रघुवंशी ने बताया कि जिले में वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक एवं सहायक अध्यापक की पद क्रम सूची कई वर्षों से जारी नहीं हुई है। अधिकतर संकुल में कार्यरत अध्यापक संवर्ग की सेवा पुस्तिका में छटवें वेतनमान के अनुमोदन का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। जिससे उन्हें छठवें वेतनमान की द्वितीय किश्त का भुगतान नहीं किया जा रहा है। शासन द्वारा अध्यापक संवर्ग को नवीन शिक्षक संवर्ग में नियुक्त होने पर अक्टूबर माह से नगद भुगतान करने हेतु आदेश जारी किया गया है।

जिले में कुछ अध्यापक संवर्ग के व्यक्तिगत कारणों जैसे रुका हुआ इंक्रीमेंट, निलंबन अथवा कोर्ट प्रकरण के कारण उनका नवीन शिक्षक संवर्ग में संविलियन नहीं हो पाया था। अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल शिवहरे ने बताया कि ग्रीष्मावकाश एवं अन्य अवकाश के दौरान स्थानीय परीक्षा, वर्चुअल क्लास या अन्य कार्यालयीन कार्य के लिए संस्था में रोके गए अध्यापक व शिक्षक संवर्ग को अर्जित अवकाश का लाभ दिया जाए।

जिले में नवीन प्राइवेट स्कूलो के लिए निर्धारित सभी मापदंड पूर्ण होने पर ही मान्यता दी जाए। अंशदायी पेंशन के तहत जिले में मिसिंग क्रेडिट का तत्काल निराकरण किया जाए। नई शिक्षक भर्ती के पूर्व पदोन्नति के पद एवं नवीन भर्ती हेतु पद विषय वार संख्या जारी की जाए इसके साथ उनकी अन्य मांगे भी पूर्ण करने की मांग रखीं। इस दौरान राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष शिवकुमार शर्मा, प्रांतीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संतोष शर्मा, शांतिलाल परिहार, धर्मेन्द्र अरोरा, झलकन गुर्जर, महावीर जैन, संदीप चौबे, दिनेश शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।