
mp news: मध्यप्रदेश में एक तरफ जहां नए जिलों के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं इसी बीच अब अशोकनगर जिले के प्रशासनिक नक्शे के जल्द बदले जाने की खबर है। दरअसल प्रदेश सरकार ने सितंबर के महीने में एक पुनर्गठन आयोग का गठन किया था और ग्वालियर संभाग के कलेक्टरों से सुझाव मांगे थे। आयोग दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। जिसके बाद अशोकनगर जिले की सीमाओं में आने वाले कुछ गांवों को अन्य जिलों या उनकी तहसीलों में शामिल किया जा सकता है। ऐसा होने पर जिले का प्रशासनिक नक्शा 21 साल बाद बदल जाएगा।
अशोकनगर जिले की सीमाएं सिंध, बेतवा, ओर और कैथन नदियों द्वारा निर्धारित हैं। कई गांव इन नदियों के दूसरी ओर स्थित हैं, जो अन्य जिलों और तहसीलों के करीब हैं लेकिन वर्तमान में अशोकनगर जिले में ही आते हैं। इस कारण से इन गांवों के लोगों को जरूरी कामों के लिए कई किलोमीटर जिला मुख्यालय या तहसील तक आना होता है जिसके कारण खासी परेशानी होती है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए सितंबर महीने में पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया था और ग्वालियर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर से सुझाव मांगे गए थे।
वर्तमान में अशोकनगर जिले के अखाईघाट, छैवलाई और घुरवार कलां गांव जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर हैं जबकि शिवपुरी के बदरवास तहसील से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर हैं। बायंगा और किरोंदा को नईसराय तहसील में जोड़ने का सुझाव चंदेरी तहसील के गांव सुरेल की चंदेरी से दूरी 40 किलोमीटर है, जबकि ईसागढ़ से यह सिर्फ 24 किलोमीटर है। पिपरई तहसील का अरोन गांव चंदेरी के नजदीक है। चंदेरी विधायक ने शाढ़ौरा तहसील के गांव उमरी, बायंगा और किरोंदा को नईसराय तहसील में जोड़ने का सुझाव दिया है। वहीं अशोकनगर तहसील के कुछ गांवों को नजदीकी तहसीलों से जोड़ने के प्रस्ताव भी है।
Updated on:
05 Dec 2024 05:40 pm
Published on:
01 Dec 2024 07:37 pm
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