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प्राइवेट दुकानों पर की यूरिया की कालाबाजारी, पुराना खाद खरीदने को मजबूर किसान

-प्राइवेट दुकानों पर की जा रही यूरिया की कालाबाजारी -विपणन संघ के गोदाम से तीन वर्ष पुराना खाद खरीदने को मजबूर किसान

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Urea manure

यूरिया खाद

अशोकनगर. किसानों को इस समय यूरिया की महती जरूरत है उन्हें पर्याप्त और समय पर इसकी उपलब्धता नहीं हो पा रही है। किसानों को यूरिया के नाम पर जहां प्राइवेट दुकानदार ठगी का शिकार बना रहे हैं दूसरी तरफ सरकारी गोदाम से तीन वर्ष पुरानी जमी हुई खाद थमाई जा रही है। नया स्टॉक न आने की वजह से किसानों को मजबूरन यह जमी हुई खाद खरीदनी पड़ रही है, या फिर प्राइवेट दुकानों पर अतिरिक्त पैसे देने पड़ रहे हैं।


गौरतलब है कि किसानों को इस समय रबी फसल के लिए यूरिया की आवश्यकता है लेकिन यहां विपणन संघ के गोदाम से पिछले शनिवार से स्टॉक खत्म होने के बाद जमा हुआ पुराना खाद दिया जा रहा है। पूछने पर बताया गया कि यह २०१५-१६ का खाद है जो गोदाम में रखा हुआ था, नमी के वजह से यह जम गया है।

नया स्टॉक पहुंचाया नहीं गया, जिसकी वजह से किसानों को इसी जमे हुए यूरिया का वितरण किया जा रहा है। लगभग 160 टन यह पुराना यूरिया गोदाम में रखा था। खासबात यह है कि इस यूरिया पर नीम कोटी तक नहीं है। किसानों को भी मजबूरन यही खाद खरीदना पड़ रहा है।

गोदाम से जहां एक ५० किग्रा की कट्टी की कीमत २८७ रुपए है वहीं अगर जिन किसानों को यह पुराना यूरिया नहीं खरीदना है उन्हें बाजार के प्राइवेट दुकानों से ३२० रुपए में यूरिया की प्रति कट्टी कीमत अदा कर ही यह उपलब्ध हो पा रहा है। या तो गोदाम से पुराना खाद खरीदें या फिर बाजार में ज्यादा कीमत अदा कर किसानों को खाद खरीदना पड़ रहा है।

किसानों को सहजता से यूरिया उपलब्ध हो इसके लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया है। जिसका फायदा प्र्राइवेट खाद भण्डार यूरिया की कालाबाजारी कर उठा रहे हैं।


किसानों को रसीद न गोदाम से मिल रहीं न प्राइवेट दुकान से
यूरिया खरीदने वाले किसानों को पक्की रसीद नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। यह गंभीर अनियमितता विपणन संघ के गोदाम और प्राइवेट दुकानों, दोनों स्तर पर बरती जा रही है। विपणन संघ के गोदाम पर सादा कागज पर पैसे और कट्टीयों की संख्या लिखकर दे दी जाती है।

जिसके पीछे तर्क है कि यहां पीओएस मशीन खराब हो गई है। जिसकी वजह से ऐसा करना पड़ रहा है। वहीं प्राइवेट दुकानों पर रसीद जरूर दी जाती है लेकिन उस पर कीमत कहीं भी अंकित नहीं की जाती। इस पर्ची को भी प्राइवेट यूरिया लेने के बाद किसानों से वापस ले लिया जाता है। जिससे इस कालाबाजारी की पोल न खुल सके।


समय पर नहीं मिला स्टॉक तो होगा किसानों को नुकसान

यूरिया खाद का नया स्टॉक अभी तक अशोकनगर में नहीं आया है। यह कब तक आएगा इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। कृषि विभाग व प्रशासन ने 500 मेट्रिक टन यूरिया की डिमांड भेजी है। लेकिन यह उपलब्ध नहीं हो सका है। खासबात यह है कि यह स्टॉक अगर आगामी १५ दिन के भीतर नहीं आता है तो किसानों को यूरिया की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। जिससे यूरिया न मिलने से फसलों को नुकसान होगा, वहीं स्टॉक में आने वाला यूरिया भी गोदाम में ही रखा रह जाएगा।

-1200 टन यूरिया की डिमांड की थी, जिसमें से एनएफएल ने ९२ टन जिले के पिपरई व मुंगावली गोदाम पर भिजवाया है। एनएफएल समय पर यूरिया पहुंचा नहीं पा रहा है। आज हम दिनभर लगे रहे। अब कह रहे है कि दो-तीन दिन में रैक से भिजवा देंगे।
एमएस राजपूत
जिला विपणन अधिकारी, गुना