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एवरेस्ट पर फंसे 15 भारतीयों ने सुषमा से लगाई मदद की गुहार, बोले- बाहर निकालने के लिए लूट रही हेलीकॉप्टर कंपनी

एवरेस्ट पर फंसे 15 भारतीयों ने सुषमा स्वराज से लगाई मदद की गुहार, सुषमा ने नेपाल स्थित भारती एम्बेसी को दिए निर्देश मामले पर जल्द हो कार्रवाई।

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एवरेस्ट पर फंसे 15 भारतीयों ने सुषमा से लगाई मदद की गुहार, बोले- बाहर निकालने के लिए लूट रही हेलिकॉप्टर कंपनी

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में शुमार माउंट एवरेस्ट पर 15 भारतीयों का एक समूह फंस गया है। फंसे 15 भारतीयों ने अब मदद के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को गुहार लगाई है। ट्विटर के जरिए इन लोगों ने सुषमा को बताया कि हम पिछले तीन दिन से एवरेस्ट पर फंसे हुए हैं और मौसम लगातार खराब होता जा रहा है। ऐसे में इन लोगों की फ्लाइट भी कैंसल हो गई है जिसके चलते इन लोगों के पास बाहर निकलने का रास्ता नहीं है।

ट्विटर पर साझा की परेशानी
सुषमा स्वराज और विदेश मंत्रालय को ट्वीट करते हुए शनिवार को अमित ठाढानी नाम के एक सर्जन ने लिखा, 'हम लूकला में बीते 2 दिन से फंसे हैं। क्या आप हमारी मदद कर सकते हैं? हम करीब 15 भारतीय यहां से सुरक्षित निकलने का इंतजार कर रहे हैं। इन्होंने ये जानकारी भी साझा की कि वे स्थानीय दूतावास से संपर्क कर चुके हैं लेकिन ट्वीट लिखे जाने तक उनकी समस्या का कोई समधान नहीं मिला है।


ट्वीट में अमित ने यह भी बताया कि लूटने पर अमादा हेलीकॉप्टर कंपनी ने प्रति व्यक्ति 600 डॉलर करीब 40 हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान करने तक हमें काठमांडू पहुंचाने से मना कर दिया है। अमित ने बताया कि काठमांडू से लुकला आने के लिए उन्होंने प्रति व्यक्ति 200 डॉलर यानी करीब 13 हजार रुपए से ज्यादा का भुगतान किया था।

सुषमा ने तुरंत दिया भरोसा
मदद का ट्विट देखते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी तुरंत एक्शन लिया और नेपाल में भारत के राजदूत मनजीव सिंह पुरी से इस मामले में दोखने के लिए कहा है। सुषमा के निर्देश के बाद नेपाल में भारतीय दूतावास के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी दी गई है कि सभी भारतीयों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।

एवरेस्ट जाने के प्रमुख रास्ता है लकुला
आपको बता दें कि लकुला ही वो जगह है जहां से एवरेस्ट पर फतह पाई जा सकती है। इसे माउंट एवरेस्ट का गेटवे भी माना जाता है। लकुला 2,860 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। लकुला पर एक छोटा सा हवाई अड्डा भी है, जिसे सबसे खतरनाक माना जाता है। गर्मियों के मौसम में ही एवरेस्ट के लिए ज्यादा पर्वतारोही यहां पहुंचते हैं।