
नेपीता : म्यांमार के अधिकारियों ने रविवार को घोषणा की कि व्यापक हिंसा के बाद बड़ी संख्या में देश से भाग कर गए रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी शुरू कर दी गई है। शनिवार को बांग्लादेश से रोहिंग्या मुसलमान का एक परिवार स्वदेश लौट आया है। मालूम हो कि हिंसा के बाद म्यांमार लौटने वाला यह पहला परिवार है।
यूएन ने चेतावनी दी थी कि वापसी लायक माहौल नहीं
मालूम हो कि शनिवार को ही संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी थी कि रोहिंग्या मुसलमानों का स्वदेश लौटना सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। यूएन की एक एजेंसी ने कहा था कि म्यांमार में लौटने के लिए अभी भी स्थितियां सुरक्षित, सम्मानजनक व अनुकूल नहीं हैं। विश्वभर में हो रही आलोचना से बचने के लिए इस चेतावनी को नजरअंदाज कर म्यांमार सरकार ने यह कदम उठाया है।
दूसरी तरफ बांग्लादेश की शिविरों में बढ़ रहे हैं शरणार्थी
मालूम हो कि बीते साल अगस्त में शुरू हुए क्रूर सैन्य अभियान से बचने के लिए करीब सात लाख रोहिंग्या अपना गृह राज्य रखाइन छोड़ कर अन्य देशों में भाग गए थे। इनमें से सबसे ज्यादा रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश में शरण ले रखी है। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में छोटी संख्या में नए रोहिंग्या मुसलमानों का पहुंचना भी जारी है, जबकि म्यांमार सरकार का दावा है कि वह लौटने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देने के लिए तैयार है।
एक रोहिंग्या मुसलमान परिवार के 5 सदस्य लौटे
सरकार की सूचना समिति के आधिकारिक फेसबुक पेज की गई पोस्ट के अनुसार, एक परिवार के पांच सदस्य शनिवार की सुबह रखाइन प्रांत के ताउंगपियोलेत्वेई वापसी शिविर लौट आए हैं। बयान के साथ पोस्ट की गई तस्वीरों में एक पुरुष, दो महिलाएं, एक लड़की और एक लड़का खाद्य आपूर्ति व राष्ट्रीय सत्यापन कार्ड हासिल करते तथा स्वास्थ्य जांच कराते दिखाई देते हैं। यह कार्ड एक तरह का पहचानपत्र है, जो नागरिकता नहीं देता है। इस पहचान पत्र को बांग्लादेश में शिविरों में रह रहे रोहिंग्या नेताओं ने अस्वीकार कर रखा है।
जनवरी से होने वाली थी यह वापसी
बांग्लादेश और म्यांमार जनवरी में वापसी की प्रक्रिया शुरू करने वाले थे, लेकिन योजना में बार-बार विलंब होता रहा है। दोनों पक्ष विलंब के पीछे तैयारियों की कमी का हवाला देते रहे हैं।
Published on:
15 Apr 2018 05:22 pm
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