9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अपनी जान बचाने को भागे 70 रोहिंग्या मुसलमान, समुद्र के रास्ते मलेशिया के लिए हुए रवाना

म्यांमार से 70 रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक नाव मलेशिया के लिए रवाना हुई है। इस महीने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर जाने वाली यह दूसरी नाव है।

2 min read
Google source verification
म्यांमार शरणार्थी

नई दिल्ली । म्यांमार की सराकर के आश्वासन के बाद भी रोहिंग्या मुसलमानों का देश से पलायन जारी है। म्यांमार से 70 रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर एक नाव मलेशिया के लिए रवाना हुई है। बता दें कि इस महीने रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर जाने वाली यह दूसरी नाव है। रोहिंग्या मुसलमान मानसून शुरु होने से पहले ही म्यांमार के रखाइन प्रांत से बाहर निकल जाना चाहते हैं। क्योंकि उनका मानना है कि मई में मानसून से समुद्र में आए तुफान से उनकी जिन्दगी खतरे में पड़ जाएगी।

12 अप्रैल को रवाना हुई थी नाव

गौरतलब है कि फोर्टिफाइ राइट्स के सह संस्थापक मैथ्यू स्मिथ ने कहा है कि 12 अप्रैल को यह नाव रवाना हुई थी और यदि थाइलैंड में किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी नहीं हुई तो अगले सप्ताह रोहिंग्या मुसलमानों से भरी नाव मलेशिया जल सीमा में पहुंच जानी चाहिए।
स्मिथ ने कहा कि यह काफी खतरनाक यात्रा है। इस यात्रा के दौरान यात्रियों को भोजन, पानी के साथ-साथ जगह की कमी को झेलना पड़ सकता है साथ ही जब्‍त होने का भी खतरा है। यह नाव गुरुवार को रवाना हुई थी। हालांकि म्यांमार सरकार ने इस मामले में फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। बता दें कि पिछले हफ्ते इंडोनेशियाई मछुआरों ने कम से कम पांच रोहिंग्‍या मुसलमानों को सुमात्रा द्वीप से बचाया था।

रोहिंग्‍या पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के खिलाफ म्‍यांमार कोर्ट ने मुकदमा बंद करने से किया इनकार

अब तक 7 लाख रोहिंग्या मुसमानों ने बांग्लादेश में ली है शरण : यूएन

संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि रखाइन प्रांत में हुई क्रूर हिंसा के बाद अगस्त से अबतक लगभग सात लाख रोहिंग्या मुसलमान अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं। अमरीका और संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार में हुए इस कार्रवाई को जाती संहार की संज्ञा दी है। हालांकि म्यांमार की सरकार ने हमेशा से इस बात को नकारा है कि उसकी सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ बरबरता पूर्ण अमानवीय व्यवहार किया है। म्यांमार की सरकार ने सदैव कहा कि यह सैन्य कार्रवाई रोहिंग्या आतंकियों के हमले के जवाब में किया गया था। रोहिंग्या आतंकियों ने पिछले वर्ष अगस्त में आर्मी बेस के साथ दो दर्जन से अधिक पुलिस चौकियों पर हमला किया था।

बांग्लादेश: सीमा से बाहर रह रहे लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों से मिलेंगे म्यांमार के मंत्री

यूएन ने कहा रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए हालात ठीक नहीं

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि म्यांमार के हालात रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए ठीक नहीं हैं। हालांकि म्यांमार की सरकार ने कहा है कि वे सरणार्थियों की वापसी के लिए बिल्कुल तैयार हैं। लेकिन रोहिंग्या शरणार्थियों का कहना है कि वे सरकार के उत्पीडन के कारण नहीं जाना चाहते हैं। बता दें कि 2012 में म्यांमार के रखाइन प्रांत में हुए हिंसा के बाद हजारों रोहिंग्या मुसलमान वहां से पलायन कर गए। 2015 में 25 हजार से अधिक रोहिंग्या नाव में भरकर अंडमान सागर के रास्ते थाइलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया के लिए भाग गए। इस दौरान नाव में आवश्यकता से अधिक लोग सवार होने के कारण कई लोग डूब गए।