
नई दिल्ली। लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने देश की सीमा से बाहर करने के बाद पहली बार म्यांमार सरकार के मंत्री शरणार्थियों के शिविरों का दौरा करेंगे। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि म्यांमार के समाज कल्याण, राहत एवं पुनर्वास मंत्री विन म्यात आय शिविरों का दौरा करेंगे जहां कुल 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। विदेश मंत्रालय में महानिदेशक तारिक मुहम्मद ने जानकारी देते हुए कहा कि म्यांमार के मंत्री 11 या 12 अप्रैल को शिविरों का दौरा कर सकते हैं। हालांकि, अभी कार्यक्रम उनका तय नहीं हुआ है।
यूएन भी करेगा शिविरों का दौरा
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से कहा गया था कि वो रोहिंग्या संकट का प्रत्यक्ष हाल जानने के लिए इस महीने म्यांमार और बांग्लादेश का दौरा कर सकती है। परिषद के अध्यक्ष गस्तावो मेजा कुआद्रा ने कहा था कि परिषद रोहिंग्या संकट के केंद्र, रेखाइन राज्य का दौरा कर पाएगी, जहां से करीब सात लाख शरणार्थी पड़ोसी देश बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि स्थिति की व्यापक समीक्षा के लिए रेखाइन का दौरा करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि परिषद के सदस्य बांग्लादेश में कॉक्स बाजार का दौरा करेंगे, जहां अधिकांश रोहिंग्या शरणार्थियों ने शरण ली है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि परिषद अगले महीने इराक का भी दौरा करेगी, जहां अगले महीने चुनाव होने हैं।
बौद्धों को अलॉट की गई रोहिंग्या की जमीन
मालूम हो कि म्यांमार की सेना द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों का नरसंहार किए जाने के बाद म्यांमार सरकार और सेना ने पूर्व नियोजित साज़िश के तहत नरसंहार में जीवित बचे लोगों को घर बार छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद अब उनके घरों और जमीनों में बौद्धों को बसाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रोहिंग्या मुसलमानों की जमीनें और घर बांग्लादेश के बौद्धों को अलॉट कर दी गई हैं। म्यांमार सरकार ने यह कदम, बांग्लादेश में शरण लेने वाले लाखों रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी को रोकने के लिए उठाया है।
बांग्लादेश पलायन कर रहे हैं रोहिंग्या मुसलमान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल 25 अगस्त को विद्रोहियों द्वारा सरकारी चौकियों पर हमला किए जाने के जवाब में म्यांमार की सेना द्वारा शुरू किए गए आक्रामक अभियान के चलते रखाइन प्रांत से कम से कम 688,000 रोहिंग्या मुसलमान पड़ोसी देश बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं। जबकि 5,00,000 रोहिंग्या वहां पहले से ही रह रहे हैं। बांग्लादेश में हाल में हुई हिंसा से पहले प्रवासी विभाग ने 30,000 रोहिंग्याओं को शरणार्थी के तौर पर मान्यता दी थी। म्यांमार और बांग्लादेश सरकार में रोहिंग्याओं के देश प्रत्यावर्तन पर एक समझौता हुआ है। इसके तहत म्यांमार इस समझौते की शुरुआत के दिन से दो वर्ष के अन्दर सभी रोहिंग्याओं का बांग्लादेश से प्रत्यावर्तन हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुससमानों के गढ़ रखाइन प्रांत में रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा सैन्य चौकियों पर हमला करने के बाद सुरक्षा बलों ने अगस्त 2017 के अन्तिम सप्ताह में जबाबी कार्रवाई के तहत रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया था। इसके बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार से पलायन शुरू कर दिया। रखाइन प्रांत में लगभग 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान रह रहे थे, जिन्हें म्यांमार सरकार ने मान्यता नहीं दी थी। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठन बोल चुके हैं कि म्यांमार में मानवाधिकारों के हनन के स्पष्ट सबूत मिले हैं। संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इस सैन्य अभियान को जातीय संहार करार देते हुए इसे नरसंहार का संकेत बताया था।
Published on:
04 Apr 2018 08:22 pm
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