
बीजिंग। चीन व ताइवान के बीच बढ़ते विवाद के बीच बीजिंग ने एक बड़ा कदम उठाया है। चीन ने देश के ईस्टर्न थियेटर कमांड में आधिकारिक तौर पर अपने J-20 स्टील्थ फाइटर जेट को तैनात कर दिया है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि यह फाइटर जेट ताइवान स्ट्रेट, जापान और अमरीका के बीच सैन्य गतिविधियों पर नजर रखेगा।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ( People's Liberation Army ) एयर फोर्स ने इस हफ्ते अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जिसे नंबर 62001 के साथ टैग किया गया, जिसमें विमान को फ्रंटलाइन यूनिट का हिस्सा बताया गया।
चीनी मीडिया ने बताया कि स्टील्थ फाइटर ने पूर्वी थिएटर कमांड में प्रवेश किया था, जिसमें ताइवान शामिल है। सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एक रिसर्च फेलो कोलिन कोह ने कहा कि विमान दो मिशन के साथ इस क्षेत्र में आया था।
कोह ने कहा, 'पूर्वी थियेटर कमान में चालू होने वाली इकाई का लक्ष्य ठीक ताइवान है।जबकि दूसरा ताइवान स्ट्रेट में अमरीकी सैन्य गतिविधियों को चुनौती देने के अलावा, ताइवान की वायु सेना के साथ गश्त लगाने वाली मध्ययुगीन रेखा के लिए खतरा है। फोटो जारी होने के बाद चीन ने एक रक्षा श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें 'अलगाववादी ताकतों' के जोखिमों पर प्रकाश डाला गया।
दस्तावेज में सेना ने कहा कि उसे ताइवान में स्वतंत्रता-समर्थक बलों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन द्वीप की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों को हमेशा पराजित करना होगा।
यह भी कहा कि तिब्बत और शिनजियांग के स्वायत्त क्षेत्रों में अलगाववादियों से काफी जोखिम थे। बता दें कि दस्तावेज जारी होने के एक दिन बाद, ताइवान स्ट्रेट के माध्यम से एक अमरीकी युद्धपोत रवाना हुआ।
इस साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन के पास 1,700 लड़ाकू विमान, रणनीतिक बमवर्षक, सामरिक बमवर्षक और बहु-मिशन सामरिक और हमले वाले विमान सहित 2,500 से अधिक विमान हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन का J-20 फाइटर एक आधुनिकीकरण के प्रयास का हिस्सा था।
ताइवान-चीन में बढ़ता तनाव
बता दें कि चीन और ताइवान में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि ताइवान एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र मानता है। इसके लेकर दोनों के बीच तकरार बढ़ता जा रहा है। इससे पहले ताइवान को अपने अधिकार क्षेत्र में करने के लिए चीन सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर चुका है। इससे डरा ताइवान अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है।
लिहाजा अब ताइवान ने अमरीका के साथ सैन्य हथियार खरीदने के लिए समझौते कर रहा है। ताइवान ने अमरीकी कंपनी के साथ 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर (150.82 अरब रुपये) के हथियार खरीदने को लेकर समझौता करने के लिए कदम बढ़ाया है।
यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने 8 जुलाई को ताइवान के साथ मल्टीबिलियन डॉलर के हथियारों के सौदे को अपनी मंजूरी दी, जिसमें 108 M1A2T एब्राम टैंक और स्टिंगर मिसाइल शामिल हैं। ताइवान के इस कदम से चीन परेशान हो गया है।
इससे पहले ताइवान पर दबाव बनाने के लिए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA ) ने चीन के 'दक्षिण-पूर्वी तट' पर सैन्य अभ्यास किया जिसमें नौसेना और वायु सेना दोनों शामिल थे।
बता दें कि अमरीका ताइवान को चीन से अलग एक देश मानता है। ताइवान की स्वतंत्रता और संप्रभूता को मान्यता देता है। इसी को लेकर चीन अमरीका से खफा है। अब ताइवान को सैन्य सामान बेचने के लेकर भी अमरीका से चीन खफा हो गया है।
चीन ने अमरीका से दो टूक कहा था कि वाशिंगटन ताइवान को लेकर ‘oneChina' के सिद्धांत का उल्लंघन कर रहा है। चीन ने अमरीका से आग्रह किया था कि चीन-अमरीका संबंधों व शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए ताइवान के मुद्दे को ठीक से हैंडल करें।
हालांकि चीनी सरकार के विरोध के बावजूद ताइवान के राष्ट्रपति साई इंग-वेन को अमरीका ने वाशिंगटन में आने की इजाजत दी थी।
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Updated on:
31 Jul 2019 12:56 pm
Published on:
30 Jul 2019 11:02 pm

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