
टोक्यो।जापान में आने सम्राट नरुहितो ने सत्ता संभाल ली है। उन्होंने आधी रात को औपचारिक रूप से सम्राट का सिंहासन ग्रहण किया। 1989 में अपने पिता के इस गद्दी पर आसीन होने के बाद नरुहितो 30 सालों के बाद सत्ता संभाल रहे हैं। उन्हके पिता ने तीस सालों तक जापान पर राज करने के बाद मंगलवार को अपनी गद्दी छोड़ दी थी। पूर्व क्राउन प्रिंस नरुहितो ने औपचारिक रूप से इम्पीरियल पैलेस के पाइन चैंबर में एक छोटे और गंभीर समारोह में बुधवार को सम्राट के रूप में अपना स्थान ग्रहण किया।
सिंहासन पर बैठे सम्राट नरुहितो
59 वर्षीय नरुहितो के सामने परंपरा की सीमा के भीतर शाही परिवार को आधुनिक बनाने और समकालीन जापान में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की चुनौतियां हैं। उन पर अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की भी चुनौती है। इंपीरियल चैंबरलेंस ने नए सम्राट को जापान के दो पवित्र खजानों को सौंपा। उन्हने एक तलवार दी गई जो वीरता का प्रतिनिधित्व करती है और एक आभूषण सौंपा गया जो परोपकार का प्रतिनिधित्व करता है।साथ ही साथ उन्हें प्रिवी सील और जापान राष्ट्र की महान सील के साथ-साथ सम्राट और राज्य की मुहरें भी सौंपी गईं। शनिवार को एक नए सम्राट सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज करेंगे और जापान के लोगों से बात करेंगे। लेकिन धूमधाम और समारोह का इंतजार 22 अक्टूबर तक चलेगा जबकि नए सम्राट और उनकी पत्नी मसाको महल में पारंपरिक वेशभूषा में दिखाई देंगे। इस दिन राजधानी की सड़कों पर नए राजा की परेड निकलेगी। परेड से पहले उन्हें विश्व नेताओं और रॉयल्स द्वारा बधाई दी जाएगी।
पूर्व सम्राट अकिहितो ने छोड़ी गद्दी
सम्राट अकिहितो ने मंगलवार को औपचारिक रूप से अपना सिंहासन छोड़ दिया। महल समारोह में दिए अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने अपने उदबोधन की घोषणा की और जापान में अपने शासनकाल की उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने जापान में आने वाले एक नए युग की आशा की और देशवासियों को इसकी बधाई दी। सम्राट नरुहितो इस महीने के अंत में सम्राट के रूप में अपने पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत करेंगे, जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नए सम्राट से मिलने के लिए जापान जाएंगे।
कौन हैं सम्राट नरुहितो
ऑक्सफोर्ड से पढ़े-लिखे नरुहितो को अपने पिता की विरासत को जारी रखने के नाजुक संतुलन का सामना करना पड़ेगा। उनके पिता सिंहासन की सदियों पुरानी परंपराओं को कायम रखते हुए राजशाही को लोगों के करीब ले आए। अपने लोकप्रिय पिता अकिहितो की तरह नए सम्राट ने जापान के 20 वीं सदी के सैन्यवाद को गिराए बिना "द्वितीय विश्व युद्ध" को सही ढंग से याद करने की आवश्यकता की चेतावनी भी दी है। उन्होंने अपने महल जीवन को समायोजित करने के लिए लंबा संघर्ष किया है। उनकी पत्नी मसाको से उन्होंने अपने मन से विवाह किया। दिसंबर में अपने जन्मदिन पर जारी एक बयान में मसाको ने साम्राज्ञी बनने के बारे में कहा था कि वह साम्राज्ञी बनने में "असुरक्षित" महसूस करती हैं लेकिन वह इस पद में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगी। नरुहितो और उनकी पत्नी, जिसे अब महारानी मसाको के नाम से जाना जाएगा, उनकी एक बेटी राजकुमारी अइको है।
विश्व से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर ..
Updated on:
01 May 2019 01:19 pm
Published on:
01 May 2019 08:34 am
बड़ी खबरें
View Allएशिया
विदेश
ट्रेंडिंग
