
आईएमएफ पाकिस्तान की वित्तीय नीतियों से असंतुष्ट, कहा- कैसे सुधरेगी अर्थव्यवस्था
लाहौर। पाकिस्तान की कर संग्रह की नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)ने नाराजगी जाहिर की है। उसका कहना है कि वर्तमान नीतियों के बल पर वह किस तरह से आईएमएफ को कर्ज चुका पाएगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने आईएमएफ से करीब छह अरब अमरीकी डॉलर का कर्ज मांगा है। इस राहत पैकेज की बदौलत पाकिस्तान अपनी आर्थिक हालात को सुधार सकेगा। प्रधानमंत्री इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान सरकार गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। उसके लिए अर्थव्यवस्था को संभालना दूभर होता जा रहा है। बीते माह,सऊदी अरब ने कहा कि वह पाकिस्तान को छह अरब अमरीकी डॉलर का राहत पैकेज प्रदान करेगा, लेकिन पाक अधिकारियों ने कहा है कि यह पर्याप्त नहीं है और इस्लामाबाद अभी भी आईएमएफ से राहत पैकेज मांगने की योजना बना रहा है।
आईएमएफ के लिए यकीन करना मुश्किल
इमरान सरकार लगातार आर्थिक संकटों से घिर रही है। सरकार ने हाल ही में इससे उबरने के लिए कई उपाए भी किए। इसमें कभी सरकारी कारों की,कभी भैसों की तो कभी हेलिकॉप्टर की बोली लगाना शामिल है। इस तरह से वह छोट—छोटे खर्च बचाकर अपने राजस्व में जान फूंकने का काम कर रही है। मगर इन कदमों को लेकर दुनिया भर में मजाक उड़ रहा है।पाकिस्तान ने अभी तक कोई भी ठोस नीति नहीं अपनाई है। इस कारण आईएमएफ भी दुविधा में है। उसका कहना है कि वह जांच परख करके ही पाकिस्तान को कर्ज दे पाएगी।
यह 13वां राहत पैकेज होगा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान आईएमएफ से छह अरब अमरीकी डॉलर की मांग कर सकता है। अगर इसे मंजूरी दे दी जाती है,तो यह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में आईएमएफ की ओर से पाकिस्तान को दिया जाने वाला 13 वां बचाव पैकेज होगा। अक्टूबर में पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से ऋण के लिए आईएमएफ से संपर्क किया था। आईएमएफ की एक टीम मौजूदा समय में चालू खाता घाटे को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान की राजकोषीय नीतियों के साथ-साथ उसकी मौद्रिक जरूरतों की समीक्षा कर रही है।
Published on:
14 Nov 2018 04:28 pm
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