
इस्लामाबाद। इमरान सरकार के लिए सरदर्द बन चुके जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने अन्य विपक्षी दलों के विरोध के चलते अपने प्रस्तावित 'आजादी मार्च' को लेकर पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत बंद कर दी है।
फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर आरोप लगाया कि चुनाव में धांधली के माध्यम से वह सत्ता में आए हैं। डॉन न्यूज के मुताबिक, फजलुर रहमान ने रविवार को अपनी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी से मिलने से रोक दिया।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत पर फैसला अब विपक्ष की रहबर समिति करेगी। बता दें कि 20 अक्टूबर को JUI-F के अब्दुल गफूर हैदरी और सीनेट के चेयरमैन संजारी के बीच वार्ता होनी थी।
31 अक्टूबर को लिकाला जाएगा आजादी मार्च
सभी मुख्य विपक्षी पार्टियों का प्रतिनिधित्व करने वाली रहबर समिति सोमवार को संयोजक और जेयूआई-एफ के नेता अकरम खान दुर्रानी के घर पर बैठक करेंगे, जिसमें यह तय किया जाएगा कि प्रधानमंत्री खान द्वारा गठित सरकारी टीम के साथ बातचीत करनी चाहिए या नहीं।
जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख ने शनिवार को अपनी पार्टी के महासचिव और सीनेटर मौलाना अब्दुल गफूर हैदरी को सीनेट के अध्यक्ष से मिलने के लिए कहा था, जिन्होंने सरकार से बातचीत करने वाली टीम के सदस्य के रूप में एक बैठक की मांग की थी।
फजलुर रहमान ने पहले स्पष्ट रूप से कहा था कि वे केवल इमरान खान के इस्तीफे के बाद ही सरकार से बात करेंगे। उनकी इस मांग को सरकार की बातचीत करने वाली टीम के प्रमुख रक्षा मंत्री परवेज खट्टक ने मानने से मना कर दिया था।
25 जून को फजल ने खुद से घोषणा करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने अक्टूबर के महीने में इस्लामाबाद में एक लंबा मार्च आयोजित करने का फैसला किया है। इससे पहले आजादी मार्च के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय की थी लेकिन बाद में इसे 31 अक्टूबर कर दिया।
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Updated on:
22 Oct 2019 11:18 am
Published on:
21 Oct 2019 08:10 pm
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