
रोहिंग्या पर रिपोर्ट तैयार करने म्यांमार गए दो पत्रकारों को 3 सितंबर को सुनाई जाएगी सजा
नेपीथा। म्यांमार में एक न्यायाधीश ने हिरासत में रखे गए दो पत्रकारों के खिलाफ फैसले को 3 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया। दोनों पत्रकार रखाइन राज्य में रोहिंग्या मुसलमान अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की घटनाओं पर रिपोर्ट तैयार कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों संवाददाताओं को म्यांमार के शासकीय गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन का दोषी करार दिए जाने पर अधिकतम 14 साल की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। पत्रकारों को दो पुलिसकर्मियों से मुलाकात के बाद 12 दिसंबर 2017 की रात को गिरफ्तार किया गया। प्रतिवादियों के अनुसार इन पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उन्हें गोपनीय दस्तावेज सौंपे थे।
पुलिस कप्तान ने दी थी गवाही
इन दोनों को तब से बिना जमानत के हिरासत में रखा गया है और अदालत के समक्ष करीब 30 बार प्रस्तुत किया गया है। मामले की जांच 9 जनवरी से शुरू हुई और आरोप पत्र औपचारिक रूप से 9 जुलाई को दाखिल किए गए थे। पुलिस कप्तान मोए यान नाइंग ने अप्रैल में गवाही दी थी कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे और उसके अधीनस्थों को संवाददाताओं को गुप्त दस्तावेज देने का आदेश दिया था। गिरफ्तार पत्रकार रखाइन में दर्जनों रोहिंग्याओं की हत्या की जांच कर रहे थे।
रोहिंग्या संकट पर तय हो जवाबदेही
बता दें कि रोहिंग्या संकट को लेकर पूरी दुनिया में बहस छिड़ी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि म्यांमार को रोहिंग्या संकट के अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़े करना चाहिए, जिसकी वजह से अगस्त 2017 से मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों लोगों को बांग्लादेश पलायन करना पड़ा है। म्यांमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष राजनयिक क्रिस्टीन स्क्रैनर बर्गनर ने कहा कि जवाबदेही से रखाइन राज्य में वास्तविक तौर पर मेल-जोल हो सकेगा। रखाइन सदियों से रोहिंग्या का घर रहा है।
Published on:
27 Aug 2018 05:12 pm
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