
श्रीलंका: अपदस्थ प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने बुलाया संसद का आपातकालीन सत्र, राष्ट्रपति ने जारी किया स्थगन आदेश
कोलंबो। श्रीलंका में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हटाए गए प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने बहुमत प्रदर्शित करने के लिए संसद का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है। श्रीलंका के कैबिनेट मंत्री रजीता सीनेरत्ना ने पुष्टि की कि सोमवार को सत्र में लगभग 113 सदस्यों के बहुमत को साबित किया जाएगा। उधर विक्रमसिंघे ने खुद को हटाए जाने को "असंवैधानिक" बताते हुए कहा कि सिरीसेना एक प्रधानमंत्री को इस तरह नहीं हटा सकते हैं।
संसद स्थगित
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसदीय अधिकारों का प्रयोग करते हुए 16 नवंबर तक के लिए 225 सदस्यीय संसद की सभी बैठकों को भी सस्पेंड करने का फैसला किया है। इस फैसले से सिरीसेना और विक्रमसिंघे की बीच एक नया गतिरोध पैदा हो सकता है। खुद को बर्खास्त किए जाने के खिलाफ विक्रमसिंघे ने संसद की आपात बैठक बुलाई थी ताकि वह अपना बहुमत साबित कर सकें।
सिरीसेना का फैसला असंवैधानिक
विक्रमसिंघे ने सिरीसेना को हटाए जाने के फैसले की निंदा करते हुए कहा कि प्रधान मंत्री को हटाने के लिए कुछ प्रावधान और प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि हमने सोमवार को संसद का एक आपातकालीन सत्र बुलाया है। हम बहुमत साबित करने के बारे में आश्वस्त हैं। आपको बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री घोषित कर दिया। शुक्रवार को अचानक देश के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया जा रहा है। मौजूदा राष्ट्रपति सिरीसेना का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला रहा क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने महिंद्रा राजपक्षे को ही हराया था।
बहुमत का दावा
विक्रमसिंघे ने एक बयान में जोर देकर कहा कि वह श्रीलंकाई संविधान के अनुच्छेद 42 (4) के तहत अब भी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि वह अब भी प्रधानमंत्री हैं। श्रीलंकाई संविधान के अनुच्छेद 42 (4) में कहा गया है कि "राष्ट्रपति उस संसद सदस्य को प्रधान मंत्री को के रूप में नियुक्त करेंगे, जो राष्ट्रपति की राय के मुताबिक संसद सदस्यों का विश्वास हासिल करता हो। विक्रमसिंघे ने अनुच्छेद 46 (2) का हवाला देते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री पद धारण करना जारी रखेंगे।
क्या है संसद का गणित
श्रीलंका की वर्तमान संसद में यूएनपी के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र मोर्चा सरकार को 106 सीटें हासिल हैं। इस बात का अंतिम फैसला सोमवार को ही हो पाएगा कि इस दल की संसद में किस दल की क्या स्थिति है। बता दें कि श्रीलंकाई वित्त और मास मीडिया मंत्री मंगला समरवीरा ने भी बहिष्कार के बारे में आक्रोश व्यक्त किया और ट्विटर पर लिखा, "प्रधान मंत्री के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति असंवैधानिक और अवैध है। यह एक लोकतांत्रिक विद्रोह है। बता दें कि अपने धुर राजनीतिक विरोधी राजपक्षे को अपना प्रधानमंत्री बनाकर मैत्रीपाला सिरीसेना ने सबको हैरत में दिया है। इसे पहले उनकी पार्टी ने गठबंधन सरकार छोड़ने की घोषणा की थी। बता दें कि गठबंधन सरकार पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की यूएनपी पार्टी भी शामिल थी और सिरीसेना उनके साथ मिलकर ही सरकार चला रहे थे। पीएम के रूप में राजपक्षे की नियुक्ति राष्ट्रपति सिरीसेना के उस फैसले के तुरंत बाद हुई जिसमें उनकी पार्टी ने कहा था कि वह गठबंधन सरकार से बाहर निकल रही हैं
Published on:
27 Oct 2018 02:11 pm

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