
पाकिस्तान की सियासत से सात दशक में बाहर हुआ कश्मीर का मुद्दा, भारत के पास ही रहेगा 'जन्नत'!
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में आगामी चुनाव को लेकर काफी गहमागहमी है। साथ ही सियासी उतार-चढ़ाव से वहां का राजनीतिक माहौल गरम है। जहां हर पार्टी लोगों से बड़े-बड़े वादे कर उनका मत भुनाने की कोशिश में है, वहां इस चुनाव में एक मुद्दा ऐसा भी है जो अचानक दब गया है। ये मुद्दा कश्मीर का है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वहां की प्रमुख पार्टियों के मैनिफेस्टो में कश्मीर के जिक्र पर कोई प्रकाश नहीं डाला है।
पिछले 14 आम चुनावों से कश्मीर रहा था अहम मुद्दा
अब से करीब तीन महीने पहले की बात करें तो पाकिस्तान में ऐसे दावे हो रहे थे कि कश्मीर को पाकिस्तान में मिला दिया जाएगा। हालांकि चुनावी मौसम की शुरुआत होते-होते ये दावे अचानक फीके पड़ने लगे। यही नहीं पिछले 71 सालों में ऐसा पहली बार हुआ कि वहां की तीन प्रमुख पार्टियों में से किसी के भी घोषणापत्र में इस बात पर कोई जोर नहीं दिया गया है। जबकि पिछले 14 आम चुनावों पर गौर किया जाए तो कश्मीर एक ऐसा मुद्दा रहा है जिसने इसकी पैरवी कर रहे सात सियासी दलों को सत्ता का दिलाने में मदद की है।
जनता का ध्यान रोजगार, शिक्षा और विकास पर
मुद्दे के यूं केंद्र से बाहर जाने के पीछे कारण है कि अब पाकिस्तान की जनता की कश्मीर में कोई खास दिलचस्पी नहीं बची है। इसके साथ ही जब भी भारत का जिक्र वहां किया जाता है तो लोगों की ओर से ब भारत के विकास का हवाला देते हुए सवाल किए जाते हैं। लोगों का प्रश्न होता है कि जीतने के बाद नेता उनके विकास के लिए क्या कदम उठाने वाले हैं। इसके चलते अब पार्टियां देश के दूसरे बड़े मुद्दों जैसे शिक्षा और गरीबी पर बात करनी शुरू कर दी है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में 25 जुलाई को जनरल एसेंबली के लिए वोटिंग होनी है।
Published on:
23 Jul 2018 01:13 pm
