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चार साल में चौथी बार चीन पहुंचे पीएम मोदी, इन विवादों को सुलझाकर लौटेंगे देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के वुहान में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी।

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बीजिंग। पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते सुधारने की शुरूआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान से की थी, जब वो बिना किसी तय कार्यक्रम के अचानक लाहौर पहुंच गए थे। लेकिन स्थिति क्या है वो हर कोई जानता है। इस बीच पीएम मोदी अपने एक और पड़ोसी मुल्क चीन से रिश्ते सुधारने की पहल कर चुके हैं और इस लक्ष्य के साथ वो अपनी 2 दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंच गए हैं। पीएम मोदी चीन के वुहान में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इस मुलाकात को सफल बनाने के लिए पहले ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर चुकी हैं।

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की चौथी चीन यात्रा
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे हैं, जहां वो शी जिनपिंग से मिलेंगे। इन दोनों नेताओं की मुलाकात काफी अहम मुद्दों को लेकर खास होने वाली है, क्योंकि पिछले कई दिनों में चीन के साथ भारत के रिश्तों में खटास आई है। खास बात ये है कि इस बैठक में न कोई समझौता होगा और न ही कोई साझा बयान जारी किया जाएगा। 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी की यह चौथी चीन यात्रा होगी।

रवाना होने से पहले ट्वीट कर दी जानकारी
पीएम मोदी ने चीन रवाना होने से पहले ट्वीट किया कि मैं चीन के वुहान की यात्रा पर जा रहा हूं, जहां 27-28 अप्रैल को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी और मैं द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व के विविध विषयों पर व्यापक चर्चा करेंगे और विचारों का आदान प्रदान करेंगे। हम अपनी अपनी दृष्टि और राष्ट्रीय विकास के बारे में प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर वर्तमान एवं भविष्य के अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के विषय शामिल होंगे। ट्वीट में पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस मुलाकात से भारत-चीन संबंधों के सामरिक और दीर्घकालिक पहलुओं के संदर्भ में समीक्षा की जाएगी।

इन मुद्दों पर हो सकती है बात

सीमा विवाद
माना जा रहा है कि मोदी और जिनपिंग की मीटिंग में भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद पर भी चर्चा हो सकती है। चीन की ओर से डोकलाम में सड़क निर्माण की कोशिशों के बाद से सीमा विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ गया है।

व्यापारिक मुद्दा भी हो सकता है शामिल
व्यापार पर भी बातचीत होने की उम्‍मीद है। इसमें व्यापार संतुलन पर जोर होगा। फिलहान चीन का भारत के बाजार पर काफी हद तक कब्जा है। इसमें संतुलन बनाने की मांग कर सकते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

पाक अधिकृत कश्‍मीर भी है बड़ा मसला
हाल के दिनों में पाकिस्‍तान के अधिकृत कश्‍मीर में चीन का दखल बढ़ा है। ये भी भारत के चिंता का विषय है। इन दोनों नेताओं की मीटिंग में इस पर भी बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

हाइड्रोपावर परियोजना
भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर हाइड्रो पावर परियोजना पर भी चर्चा हो सकती है। चीन की इस परियोजना की वजह से सुरक्षा के साथ साथ पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है।

अनौपचारिक शिखर वार्ता की तरह है यह
प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी के बीच की इस शिखर वार्ता को अनौपचारिक कहा जा रहा है। इसका कारण यह है कि दौरे में दोनों देशों की तरफ से किसी समझौते पर हस्‍ताक्षर नहीं किए जाएंगे, न ही कोई साझा बयान जारी किया जाएगा।