Afghanistan में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.3 मापी गई

HIGHLIGHTS

  • Earthquake In Afghanistan: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, इसका केंद्र राजधानी काबुल से 270 किलोमीटर उत्तर पूर्व में था।
  • भूकंप का झटका इतने तेज थे कि इसकी कंपन भारत के जम्मू-कश्मीर के इलाकों में भी महसूस किए गए।

By: Anil Kumar

Updated: 29 Oct 2020, 05:33 AM IST

काबुल। अफगानिस्तान में भूकंप ( Earthquake In Afghanistan ) के जोरदार झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.3 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, इसका केंद्र राजधानी काबुल से 270 किलोमीटर उत्तर पूर्व में था।

भूकंप का झटका इतने तेज थे कि इसकी कंपन भारत के जम्मू-कश्मीर ( Jammu kashmir ) के इलाकों में भी महसूस किए गए। भूकंप का यह झटका बुधवार की शाम को 4:18 बजे महसूस किए गए।

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अफगानिस्तान में आए भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई घरों में दरारें आ गई। लोग अपने घरों से बाहर भागते हुए भी दिखाई दिए। भूकंप आने के बादसे अफगानिस्तान के लोगों में दहशत है। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है।
बता दें कि इसी महीने के मध्य में अफगानिस्तान में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। ये झटके अफगानिस्तान के हिंदू कुश इलाके में दोपहर 3 बजकर 40 मिनट पर महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई थी।

ऐसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता

बता दें कि भूकंप की तीव्रताको मापने के लिए सीस्मोमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। जिसे सिस्मोग्राफ भी कहा जाता है। 3 या कम परिमाण की रिक्टर तीव्रता का भूकंप अक्सर इम्परसेप्टीबल कहलाता है और 7 रिक्टर की तीव्रता के भूकंप से गंभीर और ज्यादा नुकसान होता है।

क्यों आते हैं भूकंप के झटके

बता दें कि भूकंप के झटके आने का कारण धरती के अंदर चल रही गतिविधियां है। मतलब ये कि धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है- इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट।

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क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, या एक-दूसरे से टकराती हैं तब भूकंप के झटके आते हैं।

क्या होता है भूकंप का केंद्र

भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।

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