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थाईलैंड की कोर्ट ने दाऊद के गुर्गे मुन्ना झिंगड़ा को बताया पाकिस्तानी, भारत को सौंपने से इनकार

2018 में भारतीय एजेंसियों के हक में थाइलैंड की कोर्ट ने फैसला सुनाया था छोटा राजन पर हमला करने के आरोप में मुन्ना झिंगड़ा बैंकॉक की जेल में बंद है

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बैंकॉक। आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के हर मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने वाले भारत को एक बड़ा झटका लगा है। थाईलैंड की एक अदालत ने मॉस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम के गुर्गे मुन्ना झिंगड़ा को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, छोटा राजन पर बैंकॉक के हमला करने वाले मुन्ना झिंगड़ा का केस थाइलैंड की एक अदालत में चल रहा था, जहां पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने भारतीय जांच एजेंसियों के खिलाफ फैसला दिया, क्योंकि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI इस बात को साबित करने में सफल रही कि मुन्ना पाकिस्तानी नागरिक है।

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जबकि इससे पहले भारतीय एजेंसियों ने यह साबित किया था कि मुन्ना झिंगड़ा भारतीय नागिरक है। लिहाजा अब इस आधार पर अदालत ने मुन्ना को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया है। बता दें कि ISI ने दाऊद के इशारे पर बैंकॉक की अदालत में भारत के पक्ष में दिए गए फैसले की खिलाफ अपील की थी।

2000 में छोटा राजन पर मुन्ना झिंगड़ा ने किया था हमला

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय जांच एजेंसियों ने अदालत में ISI के तमाम झूठे दावों की पोल खोल दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने 8 अगस्त 2018 को भारत के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन इसके बाद दाऊद ने काफी पैसा खर्च किया और फिर ISI ने कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील दायर की।

कोर्ट ने इसपर सुनवाई करते हुए 11 सितंबर 2019 को यह मान लिया कि मुन्ना झिंगड़ा एक पाकिस्तानी नागरिक है, इसलिए भारत को नहीं सौंपा जा सकता है।

आतंकी तंत्र में बदला दाऊद इब्राहिम का अपराध तंत्र

जानकारी के मुताबिक दाऊद इब्राहिम के खास गुर्गे सैयद मुद्दसर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगड़ा को लेकर करीब दो साल से बैंकॉक की कोर्ट में मामला चल रहा है। भारत चाहता था कि अदालत मुन्ना को भारत को सौंप दे।

बताया जाता है कि मुन्ना झिंगड़ा ने दाऊद के इशारे पर ही 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन पर हमला किया था। हालांकि छोटा राजन बच गया था, जबकि उसका साथी रोहित वर्मा मारा गया था।

इस हमले के बाद मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया। मुन्ना के पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट बरामद हुआ था। फिलहाल वह बैंकॉक की जेल में बंद है।

भारत ने खोली ISI की पोल

बता दें कि भारत ने बैंकॉक की अदालत में ISI की पोल खोल कर रख दी, इसके बाद भी अदालत ने भारत के खिलाफ फैसला सुनाया है।

पाकिस्तान मुन्ना को सलीन के तौर पर जानता है और कोर्ट में उसकी शादी का झूठा सर्टिफिकेट भी जमा किया था। इतना ही नहीं मुन्ना के पिता को मरा हुआ बताया था, लेकिन भारत ने कोर्ट में मुन्ना के पिता को जिंदा पेश किया था। इसके अलावा भारतीय जांच एजेंसियों ने डीएनए सैम्पल तक अदालत में दिए थे। जिसके बाद कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला दिया था।

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लेकिन अब एक बार फिर से पाकिस्तान के हक में कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसके बाद से यह साबित हो गया है कि दाऊद पाकिस्तान में ही मौजूद है भारत के खिलाफ लगातार षड़यंत्र रच रहा है। क्योंकि दाऊद को इस बात का डर है कि यदि मुन्ना भारत को डिपोर्ट किया गया तो फिर पूरी दुनिया के सामने उसकी पोल खुल जाएगी।

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