Dhumavati Jayanti 2021: इस शुक्रवार धूमावती जयंती पर ऐसे पाएं देवी मां का आशीर्वाद

साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करतीं हैं माता...

हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को माता धूमावती की जंयती Dhumavati Jayanti आती है। मां धूमावती को माता पार्वती का अत्यंत उग्र रूप माना जाता है, ऐसे में इनके अवतरण तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है। इस बार यह अष्टमी तिथि Dhumavati Jayanti date 2021 शुक्रवार, 18 जून 2021 को आ रही है।

मां धूमावती जयंती के विशेष अवसर पर दस महाविद्या Dus Mahavidya का पूजन किया जाता है। धूमावती जयंती के दिन Dhumavati Jayanti Puja Vidhi माता धूमावती के स्तोत्र पाठ और सामूहिक जप का अनुष्ठान किया जाता है। माना जाता है कि इस दौरान काले वस्त्र में काले तिल बांधकर मां को भेंट करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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ऐसे में देशभर में भी कई जगह आयोजन होते हैं। वहीं हर साल मध्यप्रदेश के दतिया के सिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर Pitambara Peeth Temple परिसर में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां धूमावती देवी का स्थापना दिवस व पूज्यपाद स्वामी जी की पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई जाती है, करीब 41 वर्षों से एक ही दिन किए जाने की यह परंपरा अनवरत चली आ रही है।

धूमावती मां की महिमा :
बताया जाता है कि धूमावती Dhumavati देवी का स्वरुप बड़ा मलिन और भयंकर प्रतीत होता है। धूमावती देवी का स्वरूप विधवा का है और कौवा इनका वाहन है,वह श्वेत वस्त्र धारण किए हुए और खुले केश रुप में होती हैं। देवी का स्वरूप चाहे जितना उग्र क्यों न हो वह संतान के लिए कल्याणकारी ही होता है।

Dhumavati Jayanti Importance मां धूमावती के दर्शन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। मान्यता के अनुसार पापियों को दण्डित करने के लिए इनका अवतरण हुआ। नष्ट व संहार करने की सभी क्षमताएं देवी में मौजूद हैं, देवी नक्षत्र ज्येष्ठा नक्षत्र है इस कारण इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है। माना जाता है कि ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम आदि की मूल शक्ति धूमावती ही हैं। सृष्टि कलह के देवी होने के कारण इनको कलहप्रिय भी कहा जाता है।

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पंडित सुनील शर्मा के मुताबिक धार्मिक पुस्तकों के अनुसार मां धूमावती का अवतरण पापियों को दंड देने के लिए हुआ। माना जाता है कि माता धूमावती की पूजा करने से युद्ध में विजय के साथ ही विपत्तियों से मुक्ति और रोग का नाश भी होता है। जबकि इनके मात्र दर्शन करने से ही कई इच्छित फलों की प्राप्ति हो जाती है।

माना जाता है कि महाविद्या धूमावती के मंत्रों से बड़े से बड़े दुखों का नाश हो जाता है। अत: धूमावती जयंती पर रुद्राक्ष rudraksha की माला से 21, 51 या 108 बार इन मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए।

धूमावती गायत्री मंत्र- ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात।

धूमावती मंत्र...
: ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्।
: धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे, सौभाग्यदात्री सदैव करुणामयि:।
: धूं धूं धूमावती ठ: ठ:।

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जानकारों का तो यहां तक कहना है कि यदि आपके जीवन में किसी प्रकार का बड़ा संकट हो तो धूमावती जयंती Dhumavati Jayanti के दिन कुछ चीजों से हवन करके उनसे मुक्ति पाई जा सकती है।

उपाय: धूमावती जयंती के दिन कौन करें किस चीज से पूजा...
दतिया स्थित सिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर Pitambara Peeth Temple से जुड़े पंडित बब्लू तिवारी का कहना है कि पुष्प देवी मां को अत्यंत प्रिय हैं ऐसे में मात्र पुष्पों के होम से भी देवी कृपा पाई जा सकती है, साथ ही कुछ खास उपाय ऐसे भी हैं जिनकी मदद से अपनी समस्या के अनुरुप हवन कर मनोकामना पूर्ति की जा सकती हैं, जो इस प्रकार हैं...

हर हवन की है अपनी मान्यता...
: ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए:- काल सर्प दोष व क्रूर ग्रह के दोष नष्ट करने के लिए जटामांसी और काली मिर्च से होम (हवन) करना चाहिए।

: कर्ज से मुक्ति के लिए:- बहुत अधिक कर्ज होने पर उससे मुक्ति के लिए नीम की पत्तियों सहित घी से हवन करना चाहिए।

: गरीबी दूर करने के लिए:- गरीबी हमेशा के लिए दूर करने के लिए गुड़ व गन्ने से होम करना चाहिए।

: संकट व रोग दूर करने के लिए:- बड़े संकट से लेकर बड़े रोग तक को अति शीघ्र नष्ट करने के लिए मीठी रोटी व घी का होम (हवन) करना है।

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: शत्रु नाश के लिए:- शत्रु को समूल रूप से नष्ट करने के लिए राई में सेंधा नमक मिला कर होम (हवन) करना चाहिए।

: सौभाग्य प्राप्ति के लिए :- दुर्भाग्यशाली मनुष्य का भाग्य चमकाने के लिए रक्तचंदन घिस कर शहद में मिलाने के बाद इसमे जौ मिलाकर हवन करना चाहिए।

: मुक्ति के लिए:- कारागार में फंसे व्यक्ति की मुक्ति के लिए काली मिर्च से हवन करना चाहिए।

दरअसल दतिया की सिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि को ही सन् 1978 में स्वामी जी महाराज ने मां धूमावती की स्थापना एक विशेष अनुष्ठान के तहत राष्ट्र रक्षार्थ यज्ञ का आयोजन कर करवाई थी।

वहीं बताया जाता है, कि भारत पर चीन और पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमणों के दौरान भी पीठ पर विशेष यज्ञों का आयोजन राष्ट्र रक्षार्थ किया गया था। 1962 में तो चीन आक्रमण के समय दुश्मन सेना के हौसले पस्त करने के लिए स्वामी जी ने 51 कुंडीय विशेष अनुष्ठान करवाया था। इसकी पूर्णाहूति के साथ ही चीनी सेना ने देश की सीमा से अपने कदम पीछे खींच लिए थे।

दीपेश तिवारी
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