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जन्म कुंडली में इस भाव में हो गुरु, तो व्यक्ति पाता है शोहरत बनता है अमीर, देखें आपके किस भाव में हैं बृहस्पति

Guru In Janm Kundli, Kundli me aise dekhe brihaspati ki sthiti: किसी भी व्यक्ति की कुंडली में अलग-अलग भावों में विराजे गुरु का प्रभाव अलग-अलग यानी अच्छा या बुरा नजर आता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बृहस्पति का वर्ण पीला है लेकिन आंखें और बाल कुछ भूरे से होते हैं। पत्रिका.कॉम के इस लेख में प्रयाग राज के ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप पांडे आपको बता रहे हैं देव गुरु बृहस्पति के बारे में सबकुछ साथ ही यह भी कि वे किस घर या भाव में क्या प्रभाव दिखाते हैं...

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Sanjana Kumar

Apr 01, 2023

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Guru In Janm Kundli, Kundli me aise dekhe brihaspati ki sthiti: गुरु ग्रह नवग्रहों में सबसे अधिक भारी और भीमकाय हैं। यही कारण है कि इन्हें गुरु के नाम से जाना जाता है। यह पृथ्वी की कक्षा में मंगल के बाद स्थित है और सूर्य को छोड़कर, सभी अन्य ग्रहों में बड़ा ग्रह है। इसे सूर्य की एक परिक्रमा करने में पृथ्वी के समयानुसार बारह वर्ष का समय लगता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में अलग-अलग भावों में विराजे गुरु का प्रभाव अलग-अलग यानी अच्छा या बुरा नजर आता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बृहस्पति का वर्ण पीला है लेकिन आंखें और बाल कुछ भूरे से होते हैं। पत्रिका.कॉम के इस लेख में प्रयाग राज के ज्योतिषाचार्य पं. प्रदीप पांडे आपको बता रहे हैं देव गुरु बृहस्पति के बारे में सबकुछ साथ ही यह भी कि वे किस घर या भाव में क्या प्रभाव दिखाते हैं...

ऐसे होते हैं देव गुरु बृहस्पति
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक समस्त ग्रहों में गुरु या बृहस्पति सर्वाधिक बलशाली और अत्यंत शुभ माना जाता है। इसकी वृत्ति कोमल होती है और यह संपत्ति, ज्ञान का प्रदाता और मानवों का कल्याण करने वाला ग्रह माना गया है। इसे देवताओं का गुरु भी माना गया है। यह न्याय, धर्म और नीति का प्रतीक, महान पंडित, वृहत उदर, गौर वर्ण और स्थूल शरीर वाला, चतुर, सत्व गुण प्रधान, परमार्थी, ब्राह्मण जाति, आकाश तत्व वाला द्विपद ग्रह माना गया है। इसका वार बृहस्पति या गुरुवार है तथा भाग्यांक 3 है। यह ग्रह मीठे रस का अधिपति और हेमंत ऋतु का स्वामी है। कुंडली के बारह भावों में स्थित गुरु का अलग-अलग प्रभाव नजर आता है। यहां जानें किस भाव में गुरु दिखाते हैं कैसा असर, साथ ही उपाय भी...

प्रथम भाव में गुरु दिखाते हैं ऐसा प्रभाव
जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु पहले भाव में विराजे होते हैं, वह अपने गुणों से चारों ओर आदर की दृष्टि से देखा जाता है। यहां स्थित गुरु व्यक्ति को अमीर बनाते हैं, भले ही वह सीखने और शिक्षा से वंचित हो। व्यक्ति स्वस्थ होता है और दुश्मनों से निर्भिक रहने वाला होता है। व्यक्ति अपने प्रयासों से, मित्रों की मदद और सरकारी सहयोग से हर आठवें साल में बड़ी तरक्की पाता है। यदि सातवें भाव में कोई ग्रह न हो तो, विवाह के बाद सफलता और समृद्धि मिलती है। बृहस्पति पहले भाव में हो और शनि नवें भाव में हो तो व्यक्ति को सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बृहस्पति या गुरु यदि पहले भाव में हो और राहु आठवें भाव में हों तो, व्यक्ति के पिता की मृत्यु दिल के दौरे से या अस्थमा के कारण होती है।

करें ये उपाय- बुध, शुक्र और शनि से सम्बंधित वस्तुएं धार्मिक स्थानों पर लोगों को बांटें। गौ सेवा करें और अछूतों को दान देकर उनकी मदद करें। यदि शनि पांचवे भाव में हों तो व्यक्ति को घर का निर्माण नहीं करना चाहिए। यदि शनि नवम भाव में हों तो शनि से संबंधित चीजें जैसे मशीनरी आदि न खरीदें। यदि शनि ग्यारहवें या बारहवें भाव में हों तो शराब, मांस और अंडे का प्रयोग वर्जित इनके लिए वर्जित माना गया है।

दूसरे भाव में गुरु का प्रभाव
यदि जन्म कुंडली के दूसरे भाव में गुरु हों तो, व्यक्ति कवि होता है। उसमें राज्य संचालन करने की शक्ति होती है। इस घर के परिणाम बृहस्पति और शुक्र से प्रभावित होते हैं, भले ही शुक्र कुंडली में कहीं भी बैठा हो। शुक्र और बृहस्पति एक दूसरे के शत्रु माने गए हैं। इसीलिए दोनों एक दूसरे पर प्रतिकूल असर डालते हैं। परिणाम स्वरूप यदि व्यक्ति सोने आभूषणों का बिजनेस करता है, तो उसकी शुक्र से संबंधित चीजें जैसे पत्नी, धन और संपत्ति आदि नष्ट हो जाती हैं। यदि व्यक्ति की पत्नी भी उसके साथ है तो, व्यक्ति सम्मान और धन कमाता जाएगा, लेकिन उसकी पत्नी और परिवार के लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से पीडि़त रहेंगे।

करें ये उपाय: गरीबों और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने से समृद्धि बढ़ेगी। दशम भाव में स्थित शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए सांपों को दूध पिलाएं। यदि आपके घर के सामने की सड़क में कोई गड्ढा है तो उसे भर दें।

तीसरे भाव में गुरु का प्रभाव
जन्म कुंडली के तीसरे भाव में गुरु हों तो, यह व्यक्ति को नीच स्वभाव का बना देता है। लेकिन उसे सहोदर भाइयों का सुख मिलता है। तीसरे भाव का बृहस्पति व्यक्ति को समझदार और अमीर बनाता है, व्यक्ति अपने पूरे जीवन काल में सरकार से निरंतर आय प्राप्त करता रहता है। नवें भाव में स्थित शनि ऐसे व्यक्ति को दीर्घायु बनाता है। यदि शनि दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति बहुत चतुर और चालाक होता है। चतुर्थ भाव में स्थित शनि यह इशारा करता है कि व्यक्ति का पैसा और धन उसके अपने दोस्त ही लूट लेंगे। यदि बृहस्पति तीसरे भाव में किसी पापी ग्रह से पीडि़त है, तो व्यक्ति अपने किसी करीबी के कारण बरबाद हो जाएगा और कर्जदार हो जाएगा।

करें ये उपाय: देवी दुर्गा की पूजा करें और कन्याओं को मिठाई और फल देते हुए उनके पैर छू कर उनका आशीर्वाद लें। चापलूसों से दूर रहें।

चौथे भाव में गुरु दिखाते हैं ऐसा असर
कुंडली के चौथे भाव में गुरु हों तो व्यक्ति लेखक, प्रवासी, योगी, आस्तिक, कामी, पर्यटनशील, विदेश प्रिय तथा महिलाओं के पीछे-पीछे घूमने वाला होता है। चौथा घर बृहस्पति के मित्र चंद्रमा का है। बृहस्पति इस घर में उच्च का होता है। इसीलिए बृहस्पति यहां बेहद शानदार परिणाम देता है। वहीं व्यक्ति को दूसरों के भाग्य भविष्य तय करने की शक्तियां प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति पैसा, धन, और बहुत संपत्ति के साथ-साथ सरकार की ओर से सम्मान का अधिकारी होता है। ऐसे व्यक्ति को संकट के समय दैवीय सहायता प्राप्त होगी। जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ती जाती है, उसकी सुख-समृद्धि भी बढ़ती जाती है, धन भी बढ़ता जाता है।

करें ये उपाय : घर में मंदिर ना बनवाएं, इससे गरीबी और परेशानियों से भरे वैवाहिक जीवन का सामना करना पड़ेगा। बड़ों की सेवा करें, इससे सुख समृद्धि आएगी और गुरु के प्रतिकूल प्रभाव कम हो जाएंगे। सांप को दूध पिलाएं। कभी भी नंगे बदन न रहें।

पांचवें भाव में गुरु करते हैं ऐसा असर
व्यक्तिकी कुंडली में अगर गुरु पांचवें भाव में हों तो व्यक्ति विलासिता पूर्ण और आरामदायक जीवन जीना पसंद करता है। यह घर बृहस्पति और सूर्य से संबंधित होता है। इससे व्यक्ति की समृद्धि में वृद्धि पुत्र प्राप्ति के बाद होती है। व्यक्ति के जितने ज्यादा पुत्र होंगे वह उतना ही समृद्धशाली होगा। पांचवां घर सूर्य का अपना घर होता है और इस घर में सूर्य, केतू और बृहस्पति मिश्रित परिणाम देते हैं। लेकिन यदि बुध, शुक्र और राहू दूसरे, नवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में हों तो सूर्य, केतू और बृहस्पति खराब परिणाम देने वाले होते हैं।

करें ये उपाय: किसी भी तरह का दान या उपहार स्वीकार न करें। पुजारियों और साधुओं की सेवा करें।

छठवें भाव में गुरु दिखाते हैं ऐसा असर
यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली के छठवें भाव में गुरु हों तो ऐसा व्यक्ति हमेशा रोगों से घिरा रहता है। लेकिन मुकदमे आदि में वह जीत हासिल करता है। वह सदा अपने शत्रुओं को मुंह के बल गिराने की ताकत रखता है। छठवां घर बुध का होता है और केतु का भी इस घर पर प्रभाव माना गया है। इसलिए यह घर बुध, बृहस्पति और केतु का संयुक्त प्रभाव देता है। यदि बृहस्पति शुभ होगा तो व्यक्ति पवित्र स्वभाव का होगा। उसे बिना मांगे जीवन में सब कुछ मिल जाएगा। यदि बृहस्पति छठवें घर में हो और केतु शुभ हो तो व्यक्ति स्वार्थी स्वभाव का हो जाता है।

करें ये उपाय: बड़ों के नाम पर दान-दक्षिणा करें। बृहस्पति से संबंधित वस्तुएं मंदिर में भेंट करें। मुर्गों को दाना डालें। पुजारी को कपड़े भेंट करें।

ये भी पढ़ें:जन्मकुंडली में बुध की स्थिति बनाती है दुनिया भर में मशहूर, जानें कैसे देखा जाता है बुध का प्रभाव

सातवें भाव में गुरु दिखाते हैं ऐसा प्रभाव
यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु या बृहस्पति सातवें भाव में हों तो जातक की बुद्धि श्रेष्ठ होती है। ऐसा व्यक्ति भाग्यवान, विनम्र, धैर्यवान होता है। सातवां घर शुक्र का होता है, अत: यहां गुरु मिश्रित परिणाम देने वाला साबित होता है। व्यक्ति का भाग्योदय शादी के बाद होता है। वह धार्मिक कार्यों में शामिल होता है। घर के मामले में मिलने वाला अच्छा परिणाम चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि सूर्य पहले भाव में हो तो जातक एक अच्छा ज्योतिषी और आराम पसंद होगा। लेकिन यदि बृहस्पति सातवें भाव में नीच का हो और शनि नवें भाव में हों, तो व्यक्ति चोर हो सकता है। यदि बुध नवें भाव में हों, तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन परेशानियों से भरा होता है।

करें ये उपाय - जातक को कभी भी किसी को कपड़े दान में नहीं देने चाहिएं। नहीं तो व्यक्ति बड़ी गरीबी की चपेट में आ जाएगा। व्यक्ति को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। घर में किसी भी देवता की मूर्ति न रखें। हमेशा अपने साथ किसी पीले कपड़े में बांध कर सोना रखें। पीले कपड़े पहने हुए साधु और फकीरों से दूर रहें।

आठवें भाव में गुरु का प्रभाव
जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली के आठवें भाव में गुरु हों तो व्यक्ति दीर्घायु होता है। ऐसा व्यक्ति अधिक समय तक पिता के घर में नहीं रह पाता। इस घर में गुरु अच्छे परिणाम नहीं देता, लेकिन व्यक्तिको सभी सांसारिक सुख मिलते हैं। संकट के समय व्यक्ति को ईश्वर की सहायता मिलती है। धार्मिक होने से व्यक्ति का भाग्य जागता है, उसके भाग्य में वृद्धि होती है। यदि बुध, शुक्र या राहू दूसरे, पांचवें, नवें, ग्यारहवें या बारहवें भाव में हो तो, व्यक्ति के पिता बीमार होंगे और व्यक्ति की स्वयं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।

करें ये उपाय: सोना पहनें, यदि व्यक्ति सोना पहनता है, तो दुखी या बीमार नहीं होगा। राहु से संबंधित चीजें जैसे गेहूं, जौ, नारियल आदि पानी में बहाएं। श्मशान में पीपल का पेड़ लगाएं। मंदिर में घी, आलू और कपूर दान करें।

नवें भाव में गुरु का प्रभाव
जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु नवें भाव में हों, तो व्यक्ति सुंदर मकान का निर्माण करवाता है। ऐसा व्यक्ति भाई-बंधुओं से स्नेह रखने वाला होता है। यह अपने राज्य का प्रिय भी होता है। नवें घर में बृहस्पति विशेष रूप से प्रभावित होता है, इसीलिए इस भाव वाले व्यक्ति को प्रसिद्धि मिलती है। वह एक अमीर परिवार में पैदा होता है। व्यक्ति अपनी जुबान का पक्का और दीर्घायु होता है। उसके बच्चे बड़े अच्छे होंगे। यदि बृहस्पति का शत्रु ग्रह पहले, पांचवें या चौथे भाव में हो तो, बृहस्पति बुरे परिणाम देगा।

करें ये उपाय : हर रोज मंदिर जाना चाहिए और श्रद्धा भाव से भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए। शराब के सेवन से हमेशा बचना चाहिए। बहते पानी में चावल बहाना अत्यंत शुभकारी होता है।

दसवें भाव में गुरु का प्रभाव
गुरु यदि दसवें भाव में हों, तो व्यक्ति को भूमिपति और भवन प्रेमी बना देता है। ऐसा व्यक्ति चित्रकला में निपुण होत हैं। यह भाव शनि का घर होता है, इसलिए व्यक्ति जब खुश होगा तो शनि के गुणों को आत्मसात करेगा। व्यक्ति चालाक और धूर्त होगा। बृहस्पति के अच्छे परिणाम का आनंद ले पाएगा। यदि सूर्य चौथे भाव में होगा तो बृहस्पति बहुत अच्छा परिणाम देगा। चौथे भाव के शुक्र और मंगल व्यक्ति के कई विवाह सुनिश्चित कराते हैं। यदि 2, 4 और 6 भावों में मित्र ग्रह हों तो पैसों और आर्थिक मामलों में बृहस्पति अत्यधिक लाभकारी परिणाम देने वाला होता है।

करें ये उपाय : कोई भी काम शुरू करने से पहले अपनी नाक साफ करें। नदी के बहते पानी में 43 दिन तक लगातार तांबे के सिक्के बहाएं। धार्मिक स्थानों में बादाम बाटें। घर के भीतर मंदिर बनाकर मूर्तियां स्थापित न करें। माथे पर केसर का तिलक लगाएं।

ग्यारहवें भाव में गुरु का प्रभाव
जन्म कुंडली के ग्यारहवें भाव में गुरु हों, तो व्यक्ति ऐश्वर्यवान, पिता के धन को बढ़ाने वाला, व्यापार में दक्षता लिए होता है। इस घर में बृहस्पति अपने शत्रु ग्रहों बुध, शुक्र और राहु से संबंधित चीजों और रिश्तेदारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नतीजतन, जातक की पत्नी दुखी रहती है। इसी तरह, बहनें, बेटियां और बुआ भी दुखी रहेंगी। बुध सही स्थिति में है तो, भी व्यक्ति कर्जदार होता है। व्यक्ति तभी आराम से रह पाएगा जब, वह पिता, भाइयों, बहनों और मां के साथ-साथ एक संयुक्त परिवार में रहे।
करें ये उपाय: हमेशा अपने शरीर पर सोने के आभूषण धारण करें। हाथों या पैरों में तांबे का कड़ा पहनें। पीपल के पेड़ की जड़ों में जल डालें।

बारहवें भाव में गुरु का प्रभाव
व्यक्ति की जन्म कुंडली में बारहवें भाव में गुरु हों, तो ऐसा व्यक्ति आलसी, कम खर्च करने वाला, दुष्ट स्वभाव वाला होता है। व्यक्ति लोभी और लालची भी होता है। बारहवां घर बृहस्पति और राहु के संयुक्त प्रभाव में होता है तो एक-दूसरे के शत्रु होते हैं। यदि व्यक्ति अच्छा आचरण करता है, धार्मिक प्रथाओं को मानता है और सभी के लिए अच्छा चाहता है, तो वह खुशहाल होगा और रात में आरामदायक नींद का आनंद ले पाएगा। व्यक्ति अमीर और शक्तिशाली होगा। शनि के दुष्कर्मों से बचाव करने पर मशीनरी, मोटर, ट्रक और कार से संबंधित काम फायदा देंगे।

करें ये उपाय : गुरु के बुरे प्रभाव से बचने के लिए किसी भी मामले में झूठी गवाही से बचें। व्यक्तिको चाहिए कि वह साधुओं, गुरुओं और पीपल के पेड़ की सेवा करें। रात में अपने बिस्तर के सिरहाने पानी और सौंफ रखें और सुबह किसी कंटीले पेड़ की जड़ में डाल दें।

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