
भगवान श्रीराम के परम भक्त अंजनी नंदन श्री हनुमान अजेय और अमर हैं। इनका मुख लाल और शरीर सुवर्णगिरी के समान कांतिवान है। हनुमानजी की विधि-विधान और श्रद्धा भाव से उपासना सर्व कल्याणकारी है।
मनोवांछित फल प्राप्त करने और दु:ख, कष्ट, बाधा एवं भूत-प्रेत के प्रकोप से बचने के लिए इनकी आराधना लाभ देती है। वीरता के प्रतीक श्री हनुमानजी दिव्य व अलौकिक शक्तियों व असीम बल के होते हुए भी निरंतर राम भक्ति में लीन रहे, अहंकार से हमेशा दूर रहे, बल इतना कि- जेहि गिरी चरन देहि हनुमंता चलेउ सो गा पाताल तुरंता या वन उपवन मग गिरी-गृह माही, तुम्हरे बल हम डरपत नाही।
इस धरा पर चाहे कोई शत्रु हो, या कोई पापग्रह यथा राहु, केतु या शनि सता रहे हों तो आप हनुमानजी की शरण में आएं, आपको समस्त बाधाओं से मुक्ति मिल जाएगी। सम्पूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिए 'हं पवननन्दनाय स्वाहा' मन्त्र का जप करना लाभ देता है।
दैनिक जीवन में प्रतिदिन या प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को श्री हनुमान चालीसा और श्री रामचरित मानस का पाठ करने से समस्याओं और कष्टों से छुटकारा मिलता है। साथ ही सुख, सौभाग्य, विजय लाभ की प्राप्ति भी होने लगती है।
- पं. कमल किशोर शर्मा
Published on:
09 Apr 2017 12:49 pm
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