
नवरात्रि 2024 के पहले दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी
इंदौर के जय महाकाली मंदिर खजराना के संरक्षक और ज्योतिर्विद पं. गुलशन अग्रवाल के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से दुर्गा पूजा उत्सव चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। इस साल मंगलवार 9 अप्रैल 2024 से शुरू हो रहा कालयुक्त नामक विक्रम संवत् 2081 (हिंदू नववर्ष) बेहद शुभ है।
साथ ही वासंतिक (चैत्र) नवरात्रि पर्व की भी इसी दिन शुरुआत होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ अशुभ वैधृति योग में हो रहा है, हालांकि इसमें कलश स्थापना पर शास्त्रों में रोक नहीं है। ब्रह्मवेला, अभिजीत और प्रदोष काल में पूर्ण प्रतिपदा तिथि होने से इस समय घट स्थापना किया जा सकता है। इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैल पुत्री की पूजा भी होगी।
पं. गुलशन अग्रवाल के अनुसार इस साल की चैत्र नवरात्रि पर्व की समस्त तिथि उद्यातकालीन और पूर्ण हैं, इससे चैत्र नवरात्रि बिना क्षय और वृद्धि के संपूर्ण 9 दिवसीय है। इस वर्ष नवरात्रि पर्व में महाष्टमी का पूजन दिनांक 16 अप्रैल मंगलवार और रामनवमी का पूजन दिनांक 17 अप्रैल बुधवार को होगा ।
दिनांक 09 अप्रैल मंगलवार 2024
~प्रातः 03.19 बजे से 04.45 बजे तक (अमृत)
~प्रातः 04.46 बजे से 06.12 बजे तक (चर)
~प्रातः 09.19 बजे से 10.52 बजे तक (चर)
~प्रातः 10.53 बजे से दोप. 12.25 बजे तक (लाभ)
~दोप. 12.26 मि. से 01.59 मि. तक (अमृत)
~प्रातः 04.07 बजे से 04.17 बजे तक (ब्रह्मवेला+स्थिर लग्न नवांश+अमृत चौघड़िया)
~प्रातः 04.58 बजे से 06.12 बजे तक (द्वि स्व लग्न+चर चौघड़िया)
~प्रातः 06.18 बजे से 06.29 बजे तक (द्वि स्व लग्न नवांश)
~प्रातः 09.19 बजे से 10.07 बजे तक
(स्थिर लग्न+चर चौघड़िया)
~ दोप. 12.25 बजे से 12.49 बजे तक
(अभिजीत+अमृत चौघड़िया)
पं. अग्रवाल के अनुसार मां दुर्गा का कलश स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त होता है। इसलिए संभव हो तो इसी मुहूर्त में कलश स्थापना कर माता का आवाहन करना चाहिए।
जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम ।
लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम ॥
अर्थः मैं सर्वोच्च शक्ति को नमन करता हूं और आग्रह करता हूं कि लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने में और उन्हें प्राप्त करने में मेरी मदद करें।
Updated on:
09 Apr 2024 07:55 am
Published on:
08 Apr 2024 08:29 pm
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