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Magha Month Worship Secrets: माघ महीने में ये उपाय करें, साल भर रहेगी समृद्धि

माघ महीना भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ काल है। सही खान-पान, व्रत, दान और उपासना से स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है। घर पर रहकर भी कल्पवास के नियम अपनाकर माघ महीने का पूर्ण पुण्य फल पाया जा सकता है।

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माघ महीना (PC: GEMINI GENERATED)

माघ महीना (PC: GEMINI GENERATED)

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीना अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस महीने को भक्ति, तपस्या और आत्मशुद्धि का विशेष समय कहा गया है। मान्यता है कि माघ का महीना मनुष्य को नवजीवन देने वाला होता है। यही कारण है कि इस काल में की गई पूजा, व्रत, दान और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

माघ महीना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ का पुराना नाम माधव महीना था, जो भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप माधव से जुड़ा है। ज्योतिष के अनुसार माघ पूर्णिमा को मघा नक्षत्र होता है, इसी कारण इस महीने का नाम माघ पड़ा। यह महीना आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य संचय और आत्मा की शुद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसी दौरान प्रयागराज में संगम तट पर कल्पवास किया जाता है, जिससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।

माघ महीने में खान-पान और दिनचर्या कैसी हो?

आयुर्वेद के अनुसार माघ में जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।

इस महीने में भारी और गरिष्ठ भोजन से बचकर हल्का, सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। तिल और गुड़ का सेवन विशेष लाभकारी होता है। सुबह देर तक सोने से बचें और नियमित स्नान करें। धीरे-धीरे गर्म पानी छोड़कर सामान्य जल से स्नान करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है। यदि संभव हो तो दिन में एक समय भोजन करें और बाकी समय साधना व ध्यान में लगाएं।

माघ महीने के प्रमुख पर्व और उनका महत्व

माघ का महीना पर्वों से भरा होता है।

संकष्टी चतुर्थी (माघी चौथ): संतान सुख और बाधा निवारण के लिए

षटतिला एकादशी: तिल के छह प्रकार के प्रयोग से स्वास्थ्य और समृद्धि

मौनी अमावस्या: मौन व्रत से पापों का नाश और मन की शुद्धि

वसंत पंचमी: विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी सरस्वती की उपासना

जया एकादशी: ऋण और कुंडली दोषों से मुक्ति

माघी पूर्णिमा: शिव और विष्णु की संयुक्त कृपा प्राप्ति

घर पर कैसे करें कल्पवास?

हर व्यक्ति प्रयागराज जाकर कल्पवास नहीं कर सकता, लेकिन घर पर भी इसका फल पाया जा सकता है।

रोज स्नान करें, अपने इष्ट देव या गुरु मंत्र का अधिक से अधिक जप करें। सूर्यास्त से पहले एक समय सात्विक भोजन लें। प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से पूरी तरह परहेज करें। प्रतिदिन किसी जरूरतमंद को अन्न का दान करें।