Mahashivratri 2021: महाशिवरात्रि का मुहूर्त, जानिए महत्‍व और पूजा विधि

हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तारीख को महाशिवरात्रि मनाई जाती है।
मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।
इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है।

By: Shaitan Prajapat

Published: 08 Mar 2021, 08:05 AM IST

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में अलग-अलग त्योहारों का अपना अलग महत्त्व है। हर त्यौहार को विशेष रूप से मनाने का विधान है। इन्हीं में से एक है महाशिवरात्रि का त्यौहार। इस दिन भगवान शिवजी की पूजा की जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तारीख को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल यह 11 मार्च (गुरुवार) को है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है और व्रत उपवास करने का विधान है। भोलेनाथ अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त....
- महाशिवरात्रि तिथि: 11 मार्च 2021 (गुरुवार)
- चतुर्थी तिथि आरंभ: 11 मार्च 2021 को दोपहर 2:39 से
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 12 मार्च 2021 दोपहर 3:02 मिनट तक
- शिवरात्रि पारण समय: 12 मार्च सुबह 6:34 से शाम 3:02 मिनट तक

 

यह भी पढ़े :— बच्चे की बुरी नजर उतारने के 7 अचूक उपाय, एक बार जरूर आजमाए


महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठें और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। पूजा वाले स्थान को अच्छी तरह साफ कर ले। आसन पर बैठकर जल से आचमन करें। इसके बाद यज्ञोपवित (जनेऊ) धारण कर शरीर को शुद्ध करें। अब आसन की शुद्धि करें। धूप और दीप प्रज्ज्वलित करके पूजन की तैयारियां शुरू करें। इसके बाद सभी देवताओं को स्नान करवाएं। इसके बाद जिस जगह पूजा करते हैं, वहां साफ कर लें। शिव और पार्वती जी की प्रतिमा को साफ चौकी पर स्थापित करके पंचामृत से स्नान कराएं। शिवलिंग को भी स्नान करवाकर बेलपत्र, भांग धतूरा, फल, मिठाई, मीठा पान इत्यादि अर्पित करें। शिवजी को चंदन का तिलक लगाएं फिर फलों का भोग लगाएं। पूरे दिन व्रत का पालन करते हुए शिव पूजन करें। दिन भर भगवान शिव का ध्यान करें, उनकी स्तुति करें।

महाशिवरात्रि पूजन साम्रग्री
महाश‍िवरात्रि की पूजा में भोलेनाथ को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से स्नान जरूर कराएं। बाद में इत्र और इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं। गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, चावल, रोली, कलावा, जनेउ की जोड़ी, फूल, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा, शमी पत्र, आक का पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप, चन्दन, नैवेद्य आदि। मान्‍यता है क‍ि अगर व‍िध‍ि से महादेव की पूजा की जाए तो मनोवांछ‍ित सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

Show More
Shaitan Prajapat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned