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Mauni Amavasya 2026:मौनी अमावस्या की तिथि सारी अमावस्या की तिथियों में खास मानी जाती है। मौनी अमावस्या का व्रत आत्मशु्द्धि और तपस्या के लिए खास माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान किया जाता है। मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले का तीसरा शाही स्नान होता है। इस पावन तिथि पर मौन रहकर व्रत और साधना की जाती है। मौनी अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करना शुभ होता है। मौनी अमावस्या के दिन साधु संत मौन व्रत रखते हैं। शास्त्रों में मौन व्रत रखने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं मौन व्रत क्यों रखा जाता है और इसके महत्व के बारे में।
मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का विधान काफी पुराने समय से चला आ रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मनु ने मौन व्रत धारण करके गंगा स्नान किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन ही मनु का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन मौन व्रत धारण करके गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति को सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आत्मा की शुद्धि के लिए मौन व्रत करना शुभ फलदायी माना जाता है।
मौनी अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त का मौन धारण कर लें। मौन रहकर ही प्रभु का भजन करें और प्रार्थना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। इस दिन पितरों का तर्पण और दान करना उचित माना जाता है। शाम के समय में अपना मौन व्रत के प्रभु का नाम के लेकर ही खोलें। इस व्रत को करने से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का सृजन होता है।
शास्त्रों में मौनी अमावस्या को आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने वाला माना गया है। इस दिन मौन व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव और विष्णु जी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। मौनी अमावस्या को मन पर काबू करने वाला माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन लिया गया संकल्प हमारे जीवन में लंबे समय तक बना रहता है। इस दिन का व्रत करने से जीवन में शांति और स्थिरता आती है।
Published on:
16 Jan 2026 02:00 pm
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