
Narsingh Jayanti 2021
नई दिल्ली। आज 25 मई को नरसिंह जयंती मनाई जा रही है। वैशाख के महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था। भगवान नृसिंह बहुत ही शक्ति एवं पराक्रम के देवता हैं। भगवान नृसिंह ने अपने भक्त प्रहलाद की भक्ति से प्रसन्न होकर वरदान दिया था। हिंदू धर्म के अनुसार, इस तिथि पर व्रत रखा जाता है। व्रत करने वाला सभी सुखों का भागी होता है और पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होता है। आज भक्त अपने घरों में भगवान विष्णु के रूप में नरसिंह भगवान की पूजा अर्चना करते है।
जब जब अत्याचार बढ़ता है भगवान अवतार लेते है
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन भगवान विष्णु ने अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया था। भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध किया था। ऐसा कहा जाता है कि धरती पर जब जब भक्तों पर अत्याचार बढ़ने लगता है तो भगवान विष्णु ने उनकी रक्षा करने के लिए अवतार लिया है। भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था।
भगवान विष्णु का घोर विरोधी था हिरणकश्यप
पौराणिक कथा के अनुसार, हिरणकश्यप नाम का एक राक्षस था जो भगवान विष्णु का घोर विरोध था। उसके राज्य में कोई भी भगवान का नाम नहीं लेता था। अगर कोई भगवान का नाम लेता है या कोई पूजा करता तो उसको कठोर दंड देता था। उसके राज्य में भगवान का नाम लेने वालों पर बहुत अत्याचार होता था। वह चाहता था कि उसकी प्रजा उसी को भगवान मानने और उसी की पूजा करें। जैसे जैसे पाप बढ़ता गया वैसे वैसे उसका घड़ा भरता गया। उसका बेटा प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त बन गया। हिरण्यकश्यप उसको बार-बार समझा था। डराते धमकाते की वह उसी की पूजा करें नहीं तो पहाड़ी के ऊपर से फेंक देंगे।
खंबे से प्रकट हुए भगवान नरसिंह
समझाने के बाद भी वह नहीं माना तो उसके आदेश के अनुसार पहाड़ी से फेंक दिया गया लेकिन भगवान ने अपने भक्तों को कुछ नहीं होने दिया। जब हिरणकश्यप को यह पता चला तो काफी क्रोधित हुआ और भगवान को ललकारने लगा। उस समय उसके महल में एक खंबे से भगवान नरसिंह अवतार लिए। उसका रूप देखकर हिरण्यकश्यप का डर गया। नरसिंह भगवान ना तो पूरे पशु के ना ही मनुष्य। उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए अपने गोद में बिठाकर अपने ही नाखूनों से उनके सीने को चीर डाला।
ब्रह्मा जी ने दिया था वरदान
ऐसा कहा जाता है कि हिरणकश्यप ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया था। उनसे वरदान मांगा था कि उनको कोई भी इंसान या जानवर या दिन में या रात में या घर के अंदर या घर के बाहर कोई नहीं मार सकता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कश्यप का वध ना अस्त से ना शास्त्र से हो सकता था। इसलिए भगवान ने उनको गोद में बिठाकर सीना चीर कर उनका वध किया था। जिस समय उनका वध किया गया उस समय शाम का समय था और महल की देहरी पर बैठकर हिना कश्यप ने उनको मुक्ति दी थी
Published on:
25 May 2021 08:00 am
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