सोम प्रदोष व्रत 2021 : इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा, जानिए प्रदोष व्रत नियम

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। आज भगवान शिव और शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।

By: Shaitan Prajapat

Published: 24 May 2021, 07:40 AM IST

नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को होता है। एक मास में यह व्रत दो बार आता है। इस बार 24 मई यानी आज है। इस बार का प्रदोष व्रत सोमवार तिथि को पड़ रही है, इसलिए इसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं। सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। आज भगवान शिव और शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती है।

शुभ मुहूर्त:—
अभिजीत मुहूर्त- 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक।
निशिथ काल- मध्‍यरात्रि 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक।
अमृत काल- रात 11 बजकर 18 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक।

 

यह भी पढ़ें :— अक्षय तृतीया पर ही क्यों होती हैं परशुराम की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

सोम प्रदोष व्रत पूजा विधि:—
हिंदू पुराण के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जात है। सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल माना जाता है। पूजा से पहले नहा लें और साफ कपड़े पहनें। अनुष्ठान शुरू करने से पहले सभी पूजा सामग्री एकत्र करें। गंगाजल और फूलों से भरा कलश या मिट्टी का बर्तन रखें। इस दिन अभिषेक करना शुभ होता है, इसलिए शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, घी, दही, शहद का भोग लगाएं। शिवलिंग पर अगरबत्ती, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जप करें। जप के बाद प्रदोष व्रत कथा सुनें। अंत में आरती करें और पूरे परिवार में प्रसाद बांटे।
महा मृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
महा मृत्युंजय मंत्र---
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्

यह भी पढ़ें :— मोहिनी एकादशी 2021 : एकादशी व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त, जानिए इसका महत्व

प्रदोष व्रत नियम:—
प्रदोष व्रत वैसे तो निर्जला रखा जाता है इसलिए इस व्रत में फलाहार का विशेष महत्व होता है। यह व्रत पूरा दिन रखा जाता है। सुबह नित्य कर्म के बाद स्नान करें। व्रत संकल्प लें। फिर दूध का सेवन करें और पूरे दिन उपवास धारण करें। प्रदोष काल में भोलेनाथ की पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। प्रदोष व्रत में अन्न, नमक, मिर्च आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के समय एक बार ही फलाहार ग्रहण करना चाहिए।

Shaitan Prajapat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned