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Rajasthan: गांव के सरकारी स्कूल में पढ़े किसान के बेटे ने NEET परीक्षा में हासिल की 11वीं रैंक, पिता का सपना हुआ पूरा

हनुमानगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर किसान परिवार के बेटे अभिलाष गोदारा ने NEET UG 2026 में ऑल इंडिया 11वीं रैंक हासिल कर बड़ी मिसाल पेश की है। सरकारी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने वाले अभिलाष की इस सफलता ने न सिर्फ उनके पिता का डॉक्टर बनाने का सपना साकार किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती है।
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Hanumangarh NEET

Hanumangarh: परिवार वालों के साथ अभिलाष (फोटो-पत्रिका)

हनुमानगढ़। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सफलता के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन होता है। हनुमानगढ़ जिले की पल्लू तहसील के बिसरासर ग्राम पंचायत स्थित ढाणी लेघान निवासी अभिलाष गोदारा ने NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 11वीं रैंक और ओबीसी वर्ग में ऑल इंडिया चौथी रैंक हासिल की है। किसान परिवार से आने वाले अभिलाष की इस उपलब्धि से पूरे गांव में जश्न का माहौल है।

गुरुवार शाम जैसे ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने री-नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित किया, अभिलाष के परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर, मिठाई बांटकर और एक-दूसरे को बधाई देकर इस सफलता का जश्न मनाया। ग्रामीणों का कहना है कि अभिलाष की उपलब्धि पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

पिता किसान, मां गृहिणी

अभिलाष के पिता जयप्रकाश गोदारा किसान हैं, जबकि उनकी माता रामप्यारी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि आज उनका बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना साकार होने की ओर बढ़ गया है। परिवार में शिक्षा का माहौल भी रहा है। हाल ही में उनकी बहन निर्मला का चयन पटवारी पद पर हुआ है, जिससे परिवार की यह दूसरी बड़ी उपलब्धि बनी है। वहीं, उनके ताऊ रामलाल गोदारा सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक हैं और उन्होंने भी अभिलाष की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सरकारी स्कूल के मास्टर ने दिखाया था सपना

अभिलाष ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। वह बताते हैं कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक सुरेश कुमार ने सबसे पहले उन्हें डॉक्टर बनने का सपना दिखाया। इसके बाद ताऊ रामलाल गोदारा ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और कठिन समय में उनका आत्मविश्वास बनाए रखा।

बड़े पिता का रहा बड़ा योगदान

अभिलाष का कहना है कि नीट रिजल्ट में ऑल इंडिया 11वीं रैंक हासिल करना केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के विश्वास की जीत है जिन्होंने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब भी तैयारी के दौरान सिलेबस कठिन लगा या मॉक टेस्ट में अपेक्षित अंक नहीं आए, तब परिवार ने उन्हें निराश नहीं होने दिया। बड़े पापा रामलाल गोदारा ने हमेशा उन्हें मेहनत जारी रखने और लक्ष्य पर फोकस बनाए रखने की प्रेरणा दी।

सीमित संसाधनों में बड़ी सफलता

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, ताऊ, शिक्षकों और पूरे परिवार को दिया। अभिलाष ने कहा कि यह सफलता सिर्फ मेरा सपना ही नहीं बल्कि यह उन तमाम लोगों का साझा सपना पूरा हुआ है, जिन्होंने मुझ पर मुझसे भी ज्यादा भरोसा किया। एक सामान्य किसान परिवार व ग्रामीण क्षेत्र से होते हुए भी मेरे परिवार ने मुझे वह माहौल दिया जहां मैंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। मेरे बड़े पापा रामलाल गोदारा तैयारी के दौरान मेरे सबसे बड़े संबल रहे हैं। अभिलाष ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि या सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए।

युवाओं के लिए प्रेरणा

अभिलाष की इस उपलब्धि ने यह संदेश भी दिया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। अभिलाष की सफलता अब गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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