दूसरा पौराणिक, इसमें मनुष्यों एवं आलौकिक पुरुषों के जीवन के उपाख्यान आदि होते हैं और तीसरा है आनुष्ठानिक, इसमें पूजा-पद्धति, अनुष्ठान, पुष्प, धूप, धूनी-प्रभूति आदि हैं। वे कहते हैं कि मैं ऐसे धर्म का प्रचार करना चाहता हूं, जो सभी मानसिक अवस्था वाले लोगों के लिए उपयोगी हो। इसमें ज्ञान, भक्ति, योग और कर्म समभाव से रहेंगे।