
भोपाल। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक आपकी आंखों की सेहत का राज आपकी जन्म कुंडली में स्थित दूसरा भाव खोल देता है। हालांकि कुंडली के दूसरे भाव से दायीं आंख और 12वें भाव से बायीं आंख के रोगों की जानकारी मिल जाती है। वहीं दोनों आंखों के बारे में दूसरा भाव ही सबकुछ कह देता है। इसलिए माना जाता है कि यदि दूसरे भाव में दूषित या कमजोर या नीच ग्रह हों तो आंखों की बीमारियों की आशंका रहती है। ज्योतिष में सभी ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा को आंखों का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। सूर्य से दायीं आंख और चंद्रमा से बायीं आंख के रोगों का पता चल जाता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य है और बारहवें भाव में चंद्रमा है तो, आंखों का कोई गंभीर रोग होने की आशंका रहती है। इस लेख में पत्रिका.कॉम में प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप पांडे आपको बता रहे हैं कौन से ग्रह आपको आंखों की पीड़ा देते हैं और उनसे बचने के उपाय...
कुंडली में सूर्य की स्थिति
सूर्य पित्त कारक ग्रह है। आयुर्वेद के अनुसार आमतौर पर नेत्र रोग पित्त दोषों के कारण ही होते हैं। वहीं भृगु संहिता के मुताबिक सूर्य यदि आपके पहले भाव में है और नीच का है तो व्यक्ति गंभीर नेत्र रोगों का शिकार होता है। पहले भाव में सूर्य होने के कारण व्यक्ति किसी भी विषय पर बहुत ज्यादा सोच-विचार करता है और इस कारण उसे मानसिक रूप से तनाव बना रहता है। तनाव के कारण ब्लड प्रेशर होता है और इस कारण आंखों में परेशानी बढ़ती है।
- यदि कुंडली में सूर्य दूसरे स्थान पर है, तो भी नेत्र रोग होते हैं। सूर्य के साथ यदि दूसरे भाव में मंगल भी हो तो गंभीर नेत्र रोग होते हैं। ऐसा व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार भी हो सकता है और इस हादसे में स्थायी रूप से उसकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
- जन्म कुंडली का छठा भाव भी रोगों का भाव है। यदि सूर्य छठे भाव में शत्रु ग्रहों के साथ बैठा है तो, निश्चित रूप से नेत्र रोग होते हैं।
- सूर्य यदि बारहवें भाव में हैं और दूषित ग्रहों के साथ है, शत्रु राशि में हो या इस पर शत्रु ग्रहों की दृष्टि हो तो भी नेत्र रोगों की पीड़ा झेलनी पड़ती है।
कुंडली में मंगल की स्थिति
- कुंडली के दूसरे स्थान में मंगल ग्रह का होना गंभीर नेत्र रोगों का संकेत देता है। इससे व्यक्ति को ऐसे गंभीर रोग भुगतने होते हैं, जो लाइलाज होते हैं। ऐसे व्यक्ति को नर्व से संबंधित नेत्र रोग ज्यादा होते हैं।
- जन्म कुंडली के अष्टम या बारहवें भाव में यदि मंगल है तो भी व्यक्ति को नेत्र रोग होते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवनभर चश्मा लगाना पड़ता है। आंखों की सर्जरी होती है। कांटेक्ट लैंस लगाने की नौबत तक आ जाती है।
- वहीं यदि मंगल कुंडली के पहले भाव या स्थान में है तो भी गंभीर नेत्र रोग होते हैं। खासकर बायीं आंख पर ज्यादा असर होता है। भृगु संहिता के अनुसार यदि कुंडली के पहले भाव या स्थान में बुध और शनि के साथ में मंगल हो, तो व्यक्ति की बायीं आंख की रोशनी स्थायी रूप से चली जाती है।
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- बुध यदि दसवें भाव में हो तो व्यक्ति को 28 साल की आयु में आंखों का कोई गंभीर रोग होता है। किसी केमिकल के कारण आंखों की रोशनी जाने की आशंका होती है।
- दूसरे भाव में शुक्र हो तो व्यक्ति की आंखें उम्र भर अच्छी रहती हैं। लेकिन यदि दूसरे भाव का स्वामी कमजोर होकर छठे, आठवें या 12वें भाव में बैठा हो तो दूसरे भाव में शुक्रके होने का भी कोई फायदा नहीं होता।
- यदि शनि दूसरे भाव में हो तो आंखों में लगातार कोई न कोई रोग लगा रहता है। ऐसे लोगों को मोटा चश्मा भी लगाना पड़ता है।
- बारहवें भाव में राहु-केतु होने पर आंखों में चोट लगने की आशंका बनी रहती है।
इन उपायों से सुधरेगी आंखों की सेहत
- ज्योतिष शास्त्र में आंखों को खूबसूरत और निरोगी बनाए रखने के लिए सूर्य को प्रसन्न करना जरूरी माना गया है।
- इसके लिए प्रतिदिन ठीक सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें। इस दौरान जल की गिरती धार में से सूर्य को देखने का प्रयास करें।
- आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करें।
- चाक्षुसी स्रोत का नियमित पाठ करें।
- मंदिर में या घर में जब भी भगवान की पूजा करें तो आंखें बंद न करें।
- हमेशा खुली आंखों से भगवान की पूजा करें।
Updated on:
14 Jan 2023 07:25 pm
Published on:
14 Jan 2023 07:22 pm
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