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रायसेन. जिला अस्पताल में करीबन तीन महीने पूर्व जिले के प्रभारी एवं गृह व जेल मंत्री बाबूलाल गौर द्वारा हीमो डायलिसिस सेंटर का शुभारंभ किया गया था। लगभग तीन माह का समय गुजर जाने के बाद भी डायलिसिस सेंटर को आरओ का इंतजार है।
इस कारण किडनी के मरीजों को डायलिसिस सुविधा का बिल्कुल फायदा नहीं मिल पा रहा है। वहीं इस सुस्त प्रक्रिया के संबंध में अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जल्द ही किडनी मरीजों को इस सुविधा का फायदा दिलाया जाएगा। जबकि लाखों रुपए का बजट इस सुविधा के लिए खर्च किया गया है। लेकिन सवा महीना बीत जाने के बाद भी कंपनी के इकलौते इंजीनियर के न आने व आरओ प्रक्रिया पूरी न हो पाने से किडनी मरीजों को डायलिसिस सुविधा नहीं मिल पा रही है।
पांच किडनी मरीजों के हुए पंजीयन
डायलिसिस सेंटर में प्रभारी एमएल अहिरवार, टेक्निशियन रामकुमार मालवीय सहित दो स्टाफ नर्सों को पदस्थ कर दिया गया है। कंपनी के इस इकलौते इंजीनियर द्वारा प्रदेशभर के 51 जिलों में शुरू हुई इस हीमो डायलिसिस सेंटर में आरओ प्रक्रिया पूरी की जाना है। वह इंजीनियर प्रदेश के हरेक जिले में पहुंच कर जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पतालों मेंं बनाए गए डायलिसिस सेंटरों में आरओ प्रक्रिया करेगा। टेक्निशियन मालवीय ने बताया किडायलिसिस सेंटर में अभी तक जिले के पांच किडनी मरीजों ने इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। आरओ सिस्टम पूर्ण हो जाने के बाद इस सेंटर का लाभ किडनी मरीजों को जल्द मिलने लगेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है।
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