
this weak planet in horoscope makes your child greedy try this remedy: मध्यप्रदेश में 30 हजार की सैलरी पाने वाली एक महिला इंजीनियर ने एक करोड़ रुपए कीमत का बंगला बना लिया। यहां तक कि खेत, मशीनें और फॉर्म हाउस भी। करीब सात करोड़ की संपत्ति जुटाने वाली इस महिला अफसर के पास आय से 232 प्रतिशत से भी ज्यादा संपत्ति मिली है। लालच और भ्रष्टाचार का यह मामला नया नहीं है। ऐसे मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोई भी व्यक्ति विवेकशील होते हुए भी अचानक बुराइयों का पुतला क्यों बन जाता है? कैसे वह लालच के बोझ तले ऐसे दब जाता है कि फिर उसे भ्रष्ट होने में भी देर नहीं लगती, वह बिना किसी भय के अपराध की गर्त में समाता जाता है। ज्योतिष में इन सवालों का जवाब मिलता है। दरअसल ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि व्यक्ति की जन्म कुंडली में मौजूद उसके ग्रहों की शुभ या अशुभ स्थिति उसके भाग्य की दिशा तय करती है।
ज्योतिष शास्त्र में मुताबिक राशि चक्र में 12 राशियां मानी गई हैं। इसी के मुताबिक जन्म कुंडली में लग्नों की संख्या भी 12 मानी गई है। कुंडली के 12 भावों में बैठे ग्रह अलग-अलग फल प्रदान करते हैं। इन ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर पूरा प्रभाव देखने का मिलता है। जन्म कुंडली के 12 भाव में बैठे ग्रह व्यक्ति के विचार और स्वभाव के बारे में जानकारी देते हैं।
वहीं कई बार ग्रहों की अशुभ स्थिति व्यक्ति को लालची, भ्रष्टाचारी भी बना देती है। लालची व्यक्ति को कोई भी पसंद नहीं करता। ऐसे लोग हमेशा दूसरों की सफलता पर ईष्र्या की भावना भी रखते हैं। उन्हें कभी किसी की सफलता रास नहीं आती। उनका लालच उन्हें एक असंतुष्ट व्यक्ति बना देता है। इसके कारण कई बार उन्हें मुसीबत का सामना भी करना पड़ता है। अपयश झेलना पड़ता है। व्यक्ति में लालच की भावना कैसे पनपती है, ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध ग्रहों की स्थिति से माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि लालची, भ्रष्टाचारी होने के लिए कुंडली में मौजूद बृहस्पति या गुरु ग्रह जिम्मेदार होता है।
ऐसे समझें गुरु का प्रभाव
दरअसल ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति यानी गुरु को शुभ और बलशाली ग्रह माना गया है। इसका रंग पीला है। इसे ज्ञान से जोड़ा जाता है। इसीलिए जिसकी कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत, उच्च या फिर शुभ फलदायी होत है, तो व्यक्ति को गलत कार्यों से बचाता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता है। ये लोग जीवन में उच्चाधिकारी, राजनेता और सफल बिजनेस मैन बनते हैं।
इसके विपरीत यदि गुरु ग्रह कुंडली में अशुभ, नीच तत्व का हो, यह व्यक्ति को लालची भी बनाता है। जन्म कुंडली का 12वां भाव व्यय, मोक्ष और हानि का भाव है। गुरु जन्म कुंडली में यदि शुभ स्थिति में है तो इस भाव में अच्छे परिणाम देगा। लेकिन यदि गुरु अशुभ है तो व्यक्ति स्वभाव से लालची हो जाता है। उसके जीवन में मान-सम्मान में कमी आती है। भविष्य में कभी न कभी इन्हें अपने लालची स्वभाव के कारण अपयश का सामना भी करना पड़ता है।
गुरु की अशुभता को दूर करने के उपाय
यदि आपकी या आपके बच्चे की कुंडली में गुरु ग्रह अशुभ है, तो इसे दूर करने के उपाय भी ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं। गुरु के शुभ परिणाम पाने के लिए भगवान विष्णु की पूजा करें। एकादशी का व्रत रखने से लाभ मिलेगा। अपने गुरु का सम्मान करें। ऐसा करने से गुरु मजबूत होंगे और शुभ परिणाम देंगे। और आप या आपके बच्चे कोई भी गलत काम करने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करने लगेंगे।
Updated on:
13 May 2023 01:30 pm
Published on:
13 May 2023 01:28 pm

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