21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी की इन 11 सीटों पर बीजेपी की नजर, पहली बार यहां कमल खिलाने की बनी रणनीति

- मई 2020 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटें हो रही हैं खाली- पहली बार शिक्षक संघ के विधान परिषद का चुनाव लड़ने जा रही है बीजेपी- जानिए, विधान परिषद में क्या है सीटों का गणित

2 min read
Google source verification
BJP Strategy for MLC Chunav

विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जीत का डंका बजा चुकी भारतीय जनता पार्टी की नजर अब विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाने पर है

लखनऊ. विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जीत का डंका बजा चुकी भारतीय जनता पार्टी की नजर अब विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाने पर है। अगले वर्ष विधान परिषद में खाली हो रहीं स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (एमएलसी) की 11 सीटों पर चुनाव होंगे। एमएलसी चुनाव में बीजेपी पहली बार पूरी ताकत झोंक रही है। अभी एमएलसी की 11 में मात्र दो सीटें ही बीजेपी के पास है, लेकिन इस बार पार्टी की कोशिश विधान परिषद की सभी सीटों पर अपने विधायक बिठाने की है। गौरतलब है कि प्रदेश में स्नातक एवं शिक्षक क्षेत्र के 11 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल मई 2020 में पूरा हो रहा है। मार्च-अप्रैल में इन 11 सीटों पर चुनाव होने हैं।

विधानसभा में दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत वाली भाजपा सरकार विधान परिषद में अल्पमत में है। ऐसे में बीजेपी शिक्षक एवं स्नातक क्षेत्र की सभी 11 सीटें जीतकर विधान परिषद में अपनी सदस्य संख्या बढ़ाने के प्रयास में जुट गई है। इसके लिए बीजेपी ने सभी सीटों पर सहायता प्राप्त और वित्तविहीन शिक्षक संघों को तोड़ने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, सितंबर के पहले सप्ताह में बीजेपी सभी 11 उम्मीदवारों के नाम का एलान कर सकती है, ताकि कैंडिडेट्स को चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि भाजपा पहली बार शिक्षक संघ के विधान परिषद का चुनाव लड़ रही है, जबकि स्नातक का चुनाव पार्टी ने पहले भी लड़ा है।

यह भी पढ़ें : यूपी की दो राज्यसभा सीटों के लिए उपचुनाव 23 सितंबर को, यह हो सकते हैं बीजेपी कैंडिडेट

भाजपाइयों को सौंपी गई अहम यह जिम्मेदारी
भारतीय जनता पार्टी ने सभी 11 सीटों से संबंधित जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों को शिक्षक एवं स्नातक के ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने का निर्देश दिया है। साथ ही बीजेपी के प्रदेश महामंत्री और परिषद चुनाव के प्रभारी अशोक कटारिया भी सक्रिय हैं। वह चुनावी बैठकें तक कर ही रहे हैं, वहीं स्थानीय समीकरण के हिसाब से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य : दिनेश शर्मा
सूत्रों की मानें स्नातक एवं शिक्षक क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव की जिम्मेदारी उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के कंधों पर है। हालांकि, अभी ऐसी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। दिनेश शर्मा इसलिए क्योंकि वह विधान परिषद में सदन के नेता भी हैं। राज्य के सहायता प्राप्त और वित्तविहीन शिक्षक संघों को बीजेपी के पाले में लाने की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम के कंधों पर है। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरी कोशिश और ताकत के साथ एमएलसी का चुनाव लड़ेगी।

यह भी पढ़ें : 13 नहीं यूपी की 24 सीटों पर होगा चुनाव, हर हाल में सभी सीटों पर अपने विधायक चाहती है भाजपा

विधान परिषद में सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की कुल 100 सीटें हैं। इनमें से 5 सदस्य स्नातकों द्वारा और 6 सदस्य शिक्षक संघों द्वारा चुने जाते हैं। विधान परिषद में सबसे ज्यादा 56 सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं, जबकि दूसरे नंबर 21 सदस्यों वाली बीजेपी है। इनके अलावा बसपा के पास 08 और कांग्रेस के पास दो विधान परिषद सदस्य हैं। इनमें से कांग्रेस के एक सदस्य दिनेश प्रताप सिंह बीजेपी का दामन थाम चुके हैं।

यह भी पढ़ें : इस बसपा प्रत्याशी ने विधानसभा उपचुनाव लड़ने से किया इनकार, एक दिन पहले ही मायावती ने दिया था टिकट