
भारतीय लोकतंत्र का काला दिन के नाम से इतिहास में क्यों दर्ज है यह तारीख, जानें पूरी हकीकत
औरैया. क्या आप जानते है कि 25 जून 1975 की तारीख को भारतीय लोकतंत्र का काला दिन क्यों कहा जाता है। इस तारीख को 43 साल बीत गए है। आजादी के महज 28 साल बाद ही देश को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के फैसले के कारण आपातकाल के दंश से गुजरना पड़ा। 25-26 जून की रात को आपातकाल के आदेश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के दस्तखत के साथ देश में आपातकाल लागू हो गया था और जनता के सभी नागरिक अधिकार छीन लिए गए थे और जनता को पुलिस के जुल्मों का शिकार होना पड़ा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे शैलेन्द्र शुक्ला
उक्त विचार स्थानीय भारतीय विद्यालय इण्टर काॅलेज के महारानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मुख्य अतिथि शैलेन्द्र शुक्ला ने व्यक्त किए। इसके पूर्व डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पं0 दीनदयाल उपाध्याय व लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का प्रारम्भ किया गया। इस अवसर पर 38 लोकतंत्र सेनानियों को भाजपा के पदाधिकारियों द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष गीता शाक्य ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की जो कठिनाईयां है। उन्हें शासन के सम्मुख रखा जाएगा व उस पर प्रशासन से विचार-विमर्श कर उनका सम्मान पूर्वक निस्तारण किया जाएगा।
नगर के गणमान्य जन रहे उपस्थित
चूंकि लोकतंत्र सेनानियों की पूरे प्रदेश व देश में भाजपा सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्रीकांत पाठक, कृष्णमुरारी मिश्र व दुर्गाप्रसाद बाजपेयी, आनन्द चतुर्वेदी ने आपातकाल के दौरान के अपने संस्मरण सुनाये। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला प्रवासी क्षेत्रीय मंत्री नागेन्द्र गप्ता, सदर ब्लाक प्रमुख सौरभ भूषण शर्मा, विशम्भ सिंह भदौरिया, भुवन प्रकाश गुप्ता, लक्ष्मीकांत जी, नीरज जी, राहुल शुक्ला, अनिल तोमर, अवनीश त्रिपाठी, विशम्भर सिंह, सहित अन्य पदाधिकारी व नगर के गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन जिला महामंत्री श्रीराम मिश्र ने किया।
Published on:
27 Jun 2018 05:15 pm
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