
औरैया में जैसे ही 'लंगूर' गिरा सब हाथ जोड़कर खड़े हो गए और रोने लगे, फिर जो हुआ जानकर रह जाएंगे दंग
कौशांबी के कल्लू बकरे की कहानी अभी ज्यादा दिन पुरानी नहीं है। सिर्फ दो माह ही बीते हैं। औरैया में कुछ इस तरह की कहानी दोहराई गई। जब बाजार में कुछ लोग बैठे थे कि अचानक एक बड़ा सा धमाका हुआ। बैठे लोग चौंक गए। बैठे लोग दौड़े और उस घटना स्थल पर पहुंचें। देख तो एक 'लंगूर' जोर से जमीन पर आ गिरा था। उसकी हालात देख कईयों के आंखों में आंसू आ गए। और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। यूपी सहित पूरे देश में ऐसा माना जाता है कि, 'लंगूर' रामभक्त हनुमान का रुप होते हैं। फिर क्या सबने आपस में सलाह मश्विरा किया और एक मत से 'लंगूर' का भव्य अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी की गई। जिसने भी सुना और देखा सबने इसके लिए फाफुंड इलाके के लोगों की जमकर प्रशंसा की।
यह दुर्घटना नहीं आपको दिखती है नई राह
इस कहानी को कुछ इस तरह समझे। औरैया जिले के फाफुंड इलाके में बिजली के तार के संपर्क में आने से मरे एक 'लंगूर' का भव्य अंतिम संस्कार किया गया। फाफुंड इलाके का हर आदमी इस अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहता था और हुआ। सभी संस्कार हिंदू परंपराओं के अनुसार हुआ। स्थानीय लोगों ने 'लंगूर' के शव को स्नान कराया। भगवा रंग का कफन पहनाया। और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसके चारों ओर एक फूल की माला रखी। इसके बाद एक गाड़ी में अंतिम संस्कार यात्रा निकाली गई और बैंड के सदस्यों द्वारा बजाई जाने वाली शोकपूर्ण धुनों के बीच रास्ते भर लोगों ने पुष्पवर्षा की। भजन गाए गए। जयकारे बोले गए। बाद में हिंदू परंपराओं के अनुसार, लंगूर को दफना कर दिया गया। यह हादसा 25 फरवरी को हुआ था।
पशु प्रेम के कई उदाहरण
यूपी सहित पूरे देश में पशु प्रेम के कई उदाहरण हैं। कही कोई बंदर मरने पर उसकी शव यात्रा धूमधाम से निकलता है तो कहीं कोई कुत्ते के प्रेम में ऐसा करता है। ऐसी कई घटनाएं अक्सर सुनने में आती है। यह घटनाएं पशुओं के प्रति प्रेम को बढ़ावा देती है। ऐसा एक मामला कौशांबी में हुआ। जब कल्लू मर गया..
एक मामला मध्य प्रदेश का
मध्य प्रदेश में राजगढ़ जिले के डालूपुरा गांव में भी एक ऐसा मामला सुनने में आया था। जब ठंड से मरे एक लंगूर का विधि विधान से अंतिम संस्कार किया और मृत्युभोज भी दिया। मृत्युभोज में करीब 1,500 लोग शामिल हुए। हरिसिंह नामक युवक ने खुद का मुंडन भी करवाया था। कोरोना की वजह से धारा 144 लागू थी। उसके उल्लंघन में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया। लंगूर की 29-30 दिसंबर की रात को ठंड से गांव में मौत हो गई थी।
संरक्षण जरूरी
बंदर, हाथी, बाघ व भालू जैसे जानवरों का भटक कर आना और मौत के मुंह में समाना आम बात हो गई है। उनकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। और हमें उनका संरक्षण करना चाहिए।
Published on:
01 Mar 2022 10:15 pm
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