
औरैया. इन दिनों सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप) पर एक सवाल का जवाब वायरल हो रहा है। सवाल-जवाब कॉपी के एक पन्ने पर लिखा है। सवाल का जवाब सही मानते हुए लाल पेन से उसे चेक किया गया है और सवाल के जवाब की एवज में दो में से दो नंबर दिए गए हैं। इसके नीचे कॉपी चेक करने वाले के हस्ताक्षर भी हैं, जिसमें 14 जून 2017 की तारीख पड़ी है। आइए हम आपको बताते हैं क्या है वो सवाल- जवाब जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और जिले में चर्चा का केंद्र बना है।
सवाल- बापू का पूरा नाम क्या था ? वह जेल क्यों गए ?
जवाब- बापू का पूरा नाम आशाराम बापू था। वह बलात्कार के जुर्म में जेल गए।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके उपनाम 'बापू' के नाम से भी जाना जाता है। वहीं दुष्कर्म के आरोप में जेल की सजा काट रहा आसाराम के नाम के पीछे उसके अनुयायी 'बापू' लगाते हैं। इस सवाल-जवाब को कुछ लोग मजाक भर मानते हैं तो कुछ ऐसे मैसेजेज का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि देश-दुनिया में बापू की उपाधि नाम से सिर्फ महात्मा गांधी ही जाने जाते हैं, इस जवाब के जरिए अराजक तत्व उनके नाम का अपमान कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा उत्तर निश्चित ही एक मजाक हो सकता है, लेकिन ऐसे मजाक इतने बडे व्यक्तित्व पर न ही किये जायें तो ही अच्छा रहेगा।
कहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कहां...
बापू और आसाराम की तुलना जनपद में एक मैसेज इस समय सभी मोबाइलों में वायरल हो रहा है। सही है या गलत इसकी जानकारी तो संभव नहीं है, लेकिन प्रश्न लिखने और जवाब देने वाले दोनों की मानसिक प्रगति कितनी है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चित्र और चरित्र और कहां धर्म के नाम पर लोगों को ठगने वाला रेपिस्ट आसाराम।
मजाक सीमा में और मर्यादित होना चाहिए
लोगों ने कहा कि भले ही यह मजाक है, लेकिन यह बेहद घटिया है। मजाक एक सीमा में और मर्यादित होना चाहिए। स्वतंत्रता की आजादी का मतलब इस देश में इतना बढ़ गया है कि जब चाहा जिसको जो मन में आया बोल दिया। इसके परिणाम क्या होंगे उन्हें इससे कोई मतलब नहीं। लोगों ने कहा कि सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना चाहिए जो हमारे महापुरुषों के नाम से खिलवाड़ करें। क्योंकि कार्रवाई का कोई भय न होना भी होना भी सामने वाले की प्रवत्ति को और बढ़ावा देता है।
महापुरुषों के नाम पर ऐसा मजाक न करें
छात्र और शिक्षक के बीच यह प्रश्नोत्तरी निश्चित ही हास्य का केंद्र बनी हुई है, लेकिन कहीं न कहीं हमारे राष्ट्रपिता का मजाक ही बनाया गया है। पत्रिका उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे मैसेजेज का विरोध करता है। हमारा मकसद इसे बढ़ावा देना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार समाचार संस्था होने के नाते समाज में क्या घटित हो रहा है हर गतिविधि को आप तक पहुंचाना है और लोगों को आगाह करना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब ये कतई नहीं है कि लोग हमारे देश के महापुरुषों के नाम पर ऐसा मजाक करें।
Updated on:
09 Nov 2017 07:06 am
Published on:
07 Nov 2017 07:56 am
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