
बीएस 3 वाहनों पर बैन भी नोटबंदी की तरह हो गया है। लोग परेशान हो रहे हैं और पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। दरअसल, कई लोगों ने सस्ता वाहन लेने के प्रयास में बीएस 3 वाहन के लिए बुकिंग करा ली, लेकिन उनको अब तक न तो वाहन मिला है न ही अपना पैसा।
डीलर्स ने पहले तो वाहनों की बुकिंग कर ली, अब उनको बीएस 3 की जगह बीएस 4 वाहन लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के बीएस 3 वाहनों पर रोक के बाद वाहन निर्माता कंपनियों ने वाहनों पर 31 मार्च से पहले खरीदने पर बंपर छूट का ऑफर जारी किया था।
ऑफर के चलते लोगों ने नोटबंदी के बाद अपनी जमा पूंजी से वाहन के लिए बुकिंग करा ली। लेकिन सस्ते चक्कर में ग्राहकों को लेने के देने पड़ गए और रिफंड के लिए परेशान हो रहे हैं। वैसे ऐसा नहीं है कि सभी लोग परेशान हो रहे हों। बहुत लोगों ने ऑफर को भुनाते हुए सस्ते कीमत पर वाहन खरीद लिए हैं।
जानिए क्या है बीएस 3
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब वाहन कंपनियां केवल बीएस 4 वाहन ही बेच पाएंगी। बीएस यानी भारत स्टेज से पता चलता है कि आपकी गाड़ी कितना प्रदूषण फैलाती है। बीएस के जरिए ही भारत सरकार वाहनों के इंजन से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को रेगुलेट करती है।
बीएस मानक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड तय करता है। देश में चलने वाले हर वाहन के लिए बीएस का मानक जरूरी है। विदेशों में इस तरह के मानकों को कुछ और कहा जाता है। यूरोप में इस तरह के मानक को यूरो कहते हैं, वहीं अमरीका में ये मानक टीयर 1, टीयर 2 है।
Published on:
02 Apr 2017 11:16 am
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