11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Petrol Vs Diesel Cars : जानें कौन-सी कार कर सकती है आपकी मोटी बचत और किसे खरीदनें पर जेब हो जाएगी खाली

यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो आप पहले से ही जानते होंगे, कि पेट्रोल कारों का जीवन चक्र 15 वर्ष होता है जबकि यहां डीजल कारों का जीवन चक्र 10 वर्ष होता है।

2 min read
Google source verification
petrol_vs_diesel_cars.jpg

Petrol Vs Diesel cars

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच के अंतर को देखते हुए अक्सर नई कार खरीदारों को इस सवाल का सामना करना पड़ता है, कि पेट्रोल वाहन को चुने या डीजल वाहन को। इसमें कोई दो राय नहीं है, कि पेट्रोल कारों के बढ़ते माइलेज और डीजल की किफायती कीमतों ने इस निर्णय को और भी कठिन बना दिया है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीजें काफी बदल गई हैं, और कार बाजार अब पेट्रोल कारों की ओर झुक गया है। अगर आप भी पेट्रोल या डीजल वाहनों को लेकर हमेशा से भ्रमित रहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है, हम आपको बताने जा रहे हैं, कि लोग डीजल कारों पर पेट्रोल कारों को क्यों चुन रहे हैं, और क्या इसके फायदे हैं।

कीमत: पेट्रोल कारें हमेशा अपने डीजल मॉडल की तुलना में कम महंगी रही हैं, और बीएस 6 उत्सर्जन मानदंड लागू होने के बाद से यह अंतर और भी अधिक हो गया है। नए उत्सर्जन नियमों का पालन करने के लिए डीजल इंजनों को महत्वपूर्ण मकैनिकल बदलाव की आवश्यकता होती है, और इससे कारों की कीमत में महत्वपूर्ण उछाल आया है, जिसके चलते कुछ कंपनियों ने डीजल वाहनों को बनाना ही बंद कर दिया है।

ये भी पढ़ें : Mahindra Thar को स्पीड से चलाना पड़ा ड्राइवर को भारी, चंद सेकेंड में डिवाइडर से टकराई, दिया बिल्ड क्वालिटी का सबूत


ईंधन की लागत: पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच के अंतर को कम करने के साथ, डीजल कारों को खरीदने और मेंटेन रखने पर ज्यादा पैसा खर्च करना उचित नहीं है, ऐसे में पेट्रोल कारें अब पहले से अधिक माइलेज दे रही हैं, जिसके चलते देश में डीजल कारों की संख्या में और गिरावट आ रही है। वहीं डीजल कारों की तुलना में पेट्रोल कारों की सर्विसिंग करना सस्ता है। इसका कारण यह है कि डीजल वाहनों को अधिक महंगे इंजन ऑयल और स्पेयर पार्ट्स की आवश्यकता होती है जिसके चलतें मेंटेनेंस थोड़ा हाई होता है।



प्रदूषण और लाइफ साइकल:
डीजल कार से निकलने वाला उत्सर्जन पेट्रोल वाहनों से ज्यादा पर्यावरण को प्रदूषित करता है। ग्रीनहाउस गैसों के साथ, डीजल इंजन नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्पन्न करते हैं जो CO2 की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक हानिकारक होते हैं। इसके अलावा डीजल वाहन की तुलना में पेट्रोल कार को सीएनजी वन क्लीनर में बदलना आसान है।


ये भी पढ़ें : Citroen की इस किफायती एसयूवी की भारत में दिखी झलक, जानिए कब होगी लॉन्च

यदि आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो आप पहले से ही जानते होंगे, कि पेट्रोल कारों का जीवन चक्र 15 वर्ष होता है जबकि यहां डीजल कारों का जीवन चक्र 10 वर्ष होता है, जिसके बाद जब तक इन्हें किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित नहीं किया जाता है, तब तक उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है।