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पापा के खजानें को 25 साल बाद लेकर आए घर, जानें चोरी की गई Royal Enfield Bullet को खोजने की अद्भुत कहानी

वर्ष 1997 में पिताजी ने अपने जीवन का दूसरा दुपहिया वाहन खरीदा - बजाज चेतक! वहीं अगले कुछ सालों में हमारे जीवन में कई वाहन आए और चले भी गए। लेकिन प्रीमियर पद्मिनी और बजाज चेतक आज तक हमारे साथ रहे।

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1971 Bullet Model


हम भारतीय अपने वाहनों को दिल से लगाकर रखने में माहिर हैं, कार और बाइक हमारे लिए सिर्फ व्हीकल ना होकर हमारे परिवार का हिस्सा होते हैं। ऐसा ही एक किस्सा आज हम आपको बताने जा रहे हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है, कि ऐसा बहुत कम होता है, जब खोई हुई चीज को वापस पाने के लिए हमारा भाग्य साथ देता है। हमारी आज की कहानी में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां एक व्यक्ति ने अपनी 25 साल पुरानी बुलेट को खोजने के लिए दिन रात एक कर दिया।


कब शुरू हुई बुलेट की कहानी जानें उनके बेटे की जुबानी

दरअसल, कर्नाटक के ग्रामीण इलाके में रहने वाले व्यक्ति के मुताबिक उनके पिताजी ने 1971 में रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदी थी। जो उनके जीवन का पहला वाहन था। उन्होंने अपने 40 वर्षों के बैंकिंग करियर का आधे से अधिक समय यात्रा के लिए बुलेट का उपयोग करके बिताया। बात आज से ठीक 50 साल पहले की है। बुलेट के साथ पोज़ देते पापा और उनका दोस्त। MYH 1731 नंबर प्लेट की यह बुलेट उस समय की इकलौती तस्वीर में दिख रही है।

इन्होंने बताया कि दो दशक बाद वर्ष 1991 में, पिताजी ने अपनी पहली कार - प्रीमियर पद्मिनी इकोनॉमी खरीदी। जिसके बाद उनके कार्यालय ने उन्हें एक एमएम 540 और बाद में एक एंबेसडर कार चलाने को दी थी। 90 के दशक के मिड में इनके पिताजी का मणिपाल ट्रांसफर हो गया और बुलेट का उपयोग शायद ही कभी किया जाता था, क्योंकि उनका प्राथमिक वाहन अब राजदूत था। पिताजी के एक सहयोगी को हमारी बुलेट के बारे में पता था और उन्होंने बुलेट खरीदने के लिए पिताजी से बात की।


चूँकि यह पिताजी की पहली मोटरसाइकिल थी,और वह इसे बेचने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। बुलेट हमेशा ढकी हुई जगह पर खड़ी रहती थी। वहीं पिताजी के दोस्त लगातार बुलेट को खरीदनें के बारे में बात करते रहते थे। इसलिए पिताजी अपने सहयोगी को बुलेट बेचने के लिए इस शर्त के साथ तैयार हो गए, कि वे कभी इसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचेंगे तो मेरे पिताजी को ही वापस दे देंगे।

उस समय, मैं 5वीं कक्षा में पढ़ रहा था और मुझे नहीं पता था कि इस बुलेट की बिक्री का मेरे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कुछ महीने बाद, पिताजी के दोस्त बुलेट पर सवार होकर हमारे घर पहुंचे क्योंकि वे हमें नई बुलेट दिखाना चाहते थे और हाँ, यह काले रंग में चमक रही थी! यह घटना मेरे दिमाग में बहुत गहरी बैठी गई थी। वर्षों बीत गए, हमने मणिपाल छोड़ दिया और बैंगलोर में बस गए।

पिताजी अपनी सर्विस से रिटायर हो गए और उस समय मैं स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। मैं सोच रहा था कि बुलेट इस समय कहां है। वर्ष 1997 में पिताजी ने अपने जीवन का दूसरा दुपहिया वाहन खरीदा - बजाज चेतक! वहीं अगले कुछ सालों में हमारे जीवन में कई वाहन आए और चले भी गए। लेकिन प्रीमियर पद्मिनी और बजाज चेतक आज तक हमारे साथ हैं।


कैसे शुरू हुआ बुलेट को खोजने का सफर


एक क्लासिक ऑटोमोबाइल उत्साही होने के नाते, मैं बुलेट को खोजने के लिए बहुत उत्सुक था, और बुलेट को घर वापस लाने की उम्मीद में था। चूंकि बुलेट मणिपाल में बेची गई थी। इसलिए मैं मणिपाल/उडुपी भी गया और आसपास के कुछ गैरेज से पूछा कि क्या वे बुलेट के पंजीकरण नंबर के बारे में जानकर मेरे पिताजी की बुलेट का पता लगा सकते हैं। हालांकि संभावना कम थी। मैंने कुछ बुलेट उत्साही और FB में बुलेट समूहों में भी जाँच की। लेकिन अभी तक बुलेट का पता नहीं चल पाया था।

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बात फरवरी 2021 की है, मैं परिवहन ऐप में इस बुलेट के विवरण की खोज कर रहा था, मैंने देखा कि बुलेट का बीमा विवरण अपडेट किया गया था, और यह सितंबर 2021 तक वैध था। बुलेट मैसूर के पास मांड्या के किसी व्यक्ति को पंजीकृत थी। इसके बाद इन्होंने परिवहन ऐप में बुलेट का पूरा विवरण प्राप्त कर एक जाने-माने आरटीओ एजेंट से संपर्क किया, और एक लंबे प्रोसेसे के बाद ये बुलेट के मालिक तक पहुंचे।

चूंकि यह चोरी की गई बुलेट थी तो वर्तमान मालिक ने बताया कि इस बुलेट को जब्त कर लिया गया था, और हासन पुलिस स्टेशन में पार्क किया गया था, 2015 में, पुलिस विभाग ने सभी जब्त वाहनों की नीलामी की। जिसमें इस बुलेट को मैसूर के पास रहने वाले किसी व्यक्ति को 1800 रुपये में बेचा गया था, और उसने इसे वर्तमान मालिक को बेच दिया, जो टी नरसीपुरा नामक शहर में रहता है। तो अब बुलेट को घर वापस लाने का समय था। लाख कोशिश के बाद बुलेट घर वापस आ गई, और इसे देख पिताजी बेहद खुश थे।

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स्टोरी साभार : Team BHP