उन्होंने बताया कि जमीन के नीचे 200 तक भुरभुरी बालू पाई गई है। पास ही में सरयू नदी का प्रवाह है। ऐसी भौगोलिक परिस्थिति में भी मंदिर एक हजार वर्ष तक मजबूती से खड़ा रहे, इसके लिए नींव की ड्राइंग पर आइआइटी मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, गुवाहाटी व केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की के इंजीनियर परामर्श कर रहे हैं। शीघ्र ही नींव का प्रारूप तैयार होने के साथ निर्माण कार्य आरंभ होगा। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी लार्सन एंड टूब्रो को दी गयी है। सलाहकार के रूप में टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स को अनुबंधित किया गया है।