
राम मंदिर ध्वजारोहण आज: Image Source - 'FB' @srjbtkshetra
Ayodhya Ram Mandir Kovidar Flag: अयोध्या में आज भक्ति, आस्था, उत्साह और गौरव का अभूतपूर्व संगम दिखाई देगा। रामलला के भव्य मंदिर के शिखर पर आज ‘कोविदार ध्वज’ फहराया जाएगा, जो सनातन संस्कृति की हजारों वर्षों की प्राचीन परंपरा का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के बटन दबाते ही यह ध्वज पूरे देश और विश्व को अयोध्या की गौरवशाली ध्वनि सुनाएगा।
वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में कोविदार ध्वज का उल्लेख मिलता है। जब वनवास के दौरान चित्रकूट में भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा कि सेना से सुसज्जित रथ और अश्व दिखाई दे रहे हैं, तब लक्ष्मण ने कहा- ‘स एष हि महाकायः कोविदार ध्वजो रथे’। इस उद्धरण से स्पष्ट है कि कोविदार वृक्ष की छवि वाला ध्वज उस समय अयोध्या की पहचान, शक्ति, व्यवस्था और मर्यादा का राजचिन्ह हुआ करता था। समय गुजरने पर यह विरासत जन-स्मृति से विस्मृत हो गई, जिसे रीवा के इतिहासकार ललित मिश्रा ने शोध के बाद पुनः खोजा।
ध्वज पर कोविदार वृक्ष के प्रतीक के साथ सूर्य और ऊं का चिन्ह अंकित है। सूर्य का प्रतीक राम के सूर्यवंशी रघुकुल का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कोविदार वृक्ष रघुवंश का तप, त्याग और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। मंदिर ट्रस्ट की मानें तो यह ध्वज केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सनातन गौरव का दर्प है, जो राम भक्तों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा।
इस कोविदार ध्वज को अहमदाबाद की पैराशूट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने तैयार किया है। यह नायलॉन और रेशमी सिल्क के मिश्रित मजबूत फैब्रिक से बनाया गया है, ताकि तेज हवाओं और मौसम की चुनौतियों का सामना कर सके। तीन किलोमीटर की दूरी से भी यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। सेना के अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों की मौजूदगी में इसकी सख्त टेस्टिंग की गई है।
प्राण प्रतिष्ठा के समय ही राम मंदिर परिसर में कोविदार वृक्ष लगाए गए थे, जो अब 8 से 10 फीट की ऊंचाई तक बढ़ चुके हैं। जनमान्यता थी कि ‘कचनार’ रघुकुल वृक्ष है, लेकिन शोधों के बाद स्पष्ट हुआ कि वास्तविक प्रतीक ‘कोविदार’ है। अब मंदिर परिसर में यह वृक्ष श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करेगा।
हरिवंश पुराण के अनुसार महर्षि कश्यप ने पारिजात और मंदार पौधों के गुणों को मिलाकर कोविदार का विकास किया था। इसलिए इसे दुनिया का पहला ‘हाइब्रिड प्लांट’ माना जाता है। 15 से 25 मीटर ऊंचा यह वृक्ष बैंगनी फूलों और पौष्टिक फलों से युक्त होता है, जो कचनार से मिलता-जुलता है। राम मंदिर निर्माण के बाद इस वृक्ष और ध्वज को फिर से राष्ट्रीय और आध्यात्मिक महत्व मिल रहा है, जिसे नए युग की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
Updated on:
25 Nov 2025 10:15 am
Published on:
25 Nov 2025 10:15 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
