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अयोध्या में राम मंदिर की मजबूत नींव के लिए एनजीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार, एनजीआरआई क्या है जानिए

-पिलर्स की बजाय इस्तेमाल होंगे मिर्जापुर के पत्थर-इसरो से मंगवाए गए निर्माण स्थल के चित्र

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अयोध्या में राम मंदिर की मजबूत नींव के लिए एनजीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार, एनजीआरआई क्या है जानिए

अयोध्या में राम मंदिर की मजबूत नींव के लिए एनजीआरआई की रिपोर्ट का इंतजार, एनजीआरआई क्या है जानिए

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

अयोध्या. नए साल पर राम मंदिर की नींव का काम शुरू हो जाएगा। सिर्फ एक रिपोर्ट का इंतजार है। मजबूत नींव के लिए राममंदिर निर्माण समिति ने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकी अनुसंधान संस्थान एनजीआरआई से रिपोर्ट मांगी है। 15 दिन में रिपोर्ट आ जाएगी और सब कुछ ठीक रहा तो पुरातन विधि से नींव की खोदाई करके मिर्जापुर के पत्थरों से मजबूत राम लला के मंदिर की नींव बनेगी।

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रिपोर्ट का इंतजार :- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अगले 15 दिन के अंदर मंदिर की नींव का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाने की संभावना है। मजबूत नींव के लिए तकनीकी पहलुओं से जुड़ी एक रिपोर्ट का इंतजार है। जिसे हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान एनजीआरआई कर रही है। इस रिपोर्ट के बाद नींव का काम शुरू हो जाएगा। चंपत राय ने बताया कि, एनजीआरआई के 14 टेकनीशियन इस समय अयोध्या में काम कर रहे हैं, आठ दिन तक मिट्टी और जमीन का अध्ययन करेंगे व इसके फोटोग्राफ लेंगे। और 15 दिन के अंदर रिपोर्ट दे देंगे।

एक बार फिर होगा मंथन :- चंपत राय ने कहाकि, एनजीआरआई की रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञ समिति फिर से बैठक कर रिपोर्ट पर मंथन करेगी। इसमें लार्सन एंड ट्रुबो और टाटा कंसल्टिंग के इंजीनियर भी मौजूद रहेंगे और मिलकर पूरी रिपोर्ट के हिसाब से सबकुछ तय किया जाएगा।

इसरो बताएगा प्राचीन सरयू की धारा के निशान :- श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसरो से राममंदिर निर्माण स्थल के चित्र भी मंगवाए हैं। पौराणिक तथ्य है कि गोस्वामी तुलसीदास ने जब रामचरित मानस की रचना की थी उस समय सरयू नदी रामजन्मभूमि के करीब से बहती थी। इसीलिए यहां वाटर लेवल का स्टेटस भी और स्थानों के अपेक्षा ऊपर है यही कारण है कि जमीन के नीचे रेत की परत है जबकि तलाश मजबूत और ठोस जमीन की है। ट्रस्ट ने इसरो से राममंदिर के चित्र मंगवाए हैं ताकि प्राचीन सरयू की धारा कहां तक थी इसका अनुमान लगाया जा सके।

छह माह में पूरा होगा नींव का काम :- बैठक में यह तय हुआ है कि अब 1200 पिलर नहीं लगाए जाएंगे बल्कि मिर्जापुर के पत्थरों से नींव तैयार की जाएगी। करीब पचास फिट तक मलवा है जिसे हटाने के बाद पत्थरों को बिछाया जाएगा। फिर पत्थरों की एक.एक लेयर की क्षमता जांची जाएगी। भार क्षमता की जांच के बाद नींव का काम तेज हो जाएगा। इस काम की जिम्मेदारी टाटा कंसल्टेंसी व एलएंडटी को सौंपी गई है। नींव का काम पूरा होने में करीब छह माह लगेंगे।


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