
राम मंदिर दान चोरी केस
Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है। अब इस टीम के सामने सिर्फ चोरी की गुत्थी सुलझाने की ही नहीं, बल्कि उन सवालों के जवाब तलाशने की भी चुनौती है, जो पिछले करीब एक महीने से चर्चा का विषय बने हुए हैं। माना जा रहा है कि नई SIT की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की भी नजर रहेगी। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगी।
दान चोरी मामले में पुलिस पहले से जांच कर रही है, लेकिन अब तक आठ आरोपियों से आगे जांच नहीं बढ़ पाई है। कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इसी बीच सरकार ने नई SIT बनाकर जांच को नई दिशा देने की कोशिश की है। इस टीम की कमान आईजी लखनऊ रेंज किरण एस को सौंपी गई है। उनके साथ डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं। तीनों अधिकारी पहले भी इस केस की जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।
मामले की शुरुआत करीब 2.25 लाख रुपये बरामद होने से हुई थी। इसके बाद लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक की चोरी के दावे सामने आए, लेकिन अब तक किसी एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि कुल कितनी नकदी और आभूषण गायब हुए।
जांच में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को मुख्य आरोपी माना गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा नेटवर्क वह अकेले चला सकता था? उसे इतनी जिम्मेदारी किसने दी और उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे, इसकी जांच अभी बाकी है।
दान की गिनती के दौरान सुरक्षा और निगरानी से जुड़े कई नियमों का पालन नहीं होने की बातें सामने आईं। इसके बावजूद अब तक किसी बैंक कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया है। यही वजह है कि उनकी जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
गणना कक्ष में कैमरे लगे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि फुटेज की निगरानी कौन कर रहा था? अगर निगरानी हो रही थी तो चोरी क्यों नहीं पकड़ी गई? और अगर नहीं हो रही थी तो जिम्मेदार कौन था?
मामले में कुछ प्रमुख लोगों के नामों को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने किसी की प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष साझा नहीं किया है। ऐसे में इस पहलू पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
जांच के दौरान कथित फर्जी दान रसीदों की भी चर्चा हुई थी। क्या वास्तव में ऐसी रसीदें इस्तेमाल हुईं या नहीं, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि चोरी की गई रकम किन-किन लोगों तक पहुंची? क्या इसका इस्तेमाल सिर्फ आरोपियों ने किया या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे? जांच में इस पहलू को सबसे अहम माना जा रहा है।
सरकार जल्द ही नई SIT के गठन और जांच की स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नई जांच टीम उन सवालों के जवाब दे पाएगी, जिनका इंतजार रामभक्तों से लेकर आम लोगों तक सभी को है।
Updated on:
27 Jul 2026 08:08 am
Published on:
27 Jul 2026 08:08 am
