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कारसेवक की जुबानी: पुलिस काटती थी ‘राम भक्ति चालान’, भगवा देखते ही पीटना शुरू

मुलायम सिंह सरकार में राम भक्ति एक अपराध था और यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि जेल से दिये गए सर्टिफिकेट इस बात की तस्दीक कर रहे है।

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कार सेवकों ने सर्टिफिकेट दिखाते हुए कहानी सुनाई

नब्बे का दशक जब प्रदेश के सीएम कहते थे कि अयोध्या में परिन्दा भी पर नहीं मार सकता। उस समय सरकार की नजर में रामभक्ति अपराध थी। असंख्य रामभक्तों ने बलिदान दिए, लाठियां खायीं, जेल गए, घरों से लम्बी फरारी काटी, आज भी जब पुरबाई हवा चलती है पुलिसिया लाठियों के दर्द हरे हो जाते हैं। ये कहना है कारसेवक अर्जुंदेव वार्षणेय का जिन्हें 1990 में 13 दिन जेल में रहना पड़ा।

“रामभक्ति का चालान काट रही थी सरकार”
मुलायम सिंह सरकार में राम भक्ति एक अपराध था और यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि जेल से दिये गए सर्टिफिकेट इस बात की तस्दीक कर रहे है। कारसेवक अर्जुनदेव वार्षणेय ने बताया कि 1990 के उस दौर में अयोध्या कार सेवा करने जा रहे कार सेवकों को जब पुलिस ने बंदी बनाया और जेल में ठूंस दिया तो जेल की तरफ से उनको एक प्रमाण पत्र दिया गया था जिसमें अपराध का कारण लिखा था "राम भक्ति" चालान।

सन 1990, यह वह दौर था जब अयोध्या में कार सेवा करने के लिए पूरे देश से हिंदू वादियों का जत्था उमड़ पड़ा था। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। मुलायम सिंह उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मुलायम सिंह ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया हुआ था कि अयोध्या में व्यक्ति क्या कोई परिंदा भी पर ना मार पाए। इसके बाद पुलिस ने बड़ी मात्रा में कार सेवकों के ऊपर बर्बरता की और उन्हें जेल में ठूंस दिया गया था। उस समय मुलायम सिंह सरकार में राम भक्ति भी एक अपराध था। अलीगढ़ में सैकड़ो कर सेवकों को पुलिस ने जेल में ठूस दिया था और जब वह जेल से रिहा हुए तो उनको एक प्रमाण पत्र दिया गया जिस पर अपराध था राम भक्ति चालान।

“तिलक लगाने से डरने लगे थे लोग”
कार सेवा में जेल गए अलीगढ़ के मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि 1990 का दशक राम जन्म भूमि के लिए पूरे देश में करोड़ों रामभक्त जुनून में थे। हमारा भी डेढ़ सौ लोगों का जत्था था। जो केशव नगर के रेलवे स्टेशन के लिए निकला। जिसे रास्ते में रोककर गिरफ्तार कर लिया गया और कारागार में भेज दिया गया। मनोज अग्रवाल ने बताया कि यदि कोई भगवा पटका पहनकर निकल जाता था तो उसको शक की निगाहों से देखा जाता था। उससे पूछताछ होती थी। जो संदिग्ध लगता था तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता था। तिलक लगाने से भी डर लगने लगा था। कारसेवक मनोज ने बताया कि उस दौर में मुगल काल की यादें ताजा हो गई थी। उन्होंने जिस तरह से मुगल आक्रांता की हिंदू संस्कृति को मिटाने के लिए कहानी सुनी थी। तब केस माहौल उस तरह का ही महसूस हो रही थी।

“अयोध्या की तरफ़ जाने वाले ट्रेन में से उतार कर जेल भेजा”
उस समय जेल गए एक अन्य व्यक्ति अनुराग वार्ष्णेय ने बताया की वो विश्व हिंदू परिषद के ग्रुप में थे। जब वो कारसेवा के लिए जा रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। तो उनसे नजर बचाकर वो स्टेशन की तरफ चले गए। लेकिन बाकी लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। मैं जब ट्रेन में बैठा तो पुलिस ने पकड़ लिया और डंडा मार के मेरा पैर तोड़ दिया। फिर पीटने के बाद बन्ना देवी थाने ले गए और वहां ले जाकर मुझे एक दिन वही रखा और जो प्रताड़ना दे सकते थे उन्होंने वह दी। उसके बाद शहर के लोगों ने कोशिश करके मेरा चालान करवा कर मुझे जेल भिजवाया। अनुराग बताते हैं कि जब वो जेल में थे तो उनके घर वाले बहुत परेशान थे और उस समय यह माहौल हो रहा था कि अगर कोई आदमी मंदिर भी जाता तो पाप कर रहा है। किसी की मंदिर जाने की भी हिम्मत नहीं होती थी। ऐसे में उन्हें 13 दिन तक जेल में रहना पड़ा और फिर छूटने के बाद जेलर ने उन्हें रामभक्ति के चालान का प्रमाण पत्र दिया था।

- यह खबर नीलांजय तिवारी ने भेजी है। वह पत्रिका के साथ बतौर स्वतंत्र पत्रकार जुड़े हुए हैं।

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