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भगवान राम और अयोध्या की संस्कृति पर सवालों के दें जवाब और जीतें आकर्षक उपहार, जल्दी करें

Ram Mandir Katha Quiz 2: राम मंदिर कथा क्विज की इस कड़ी में आज हम आपको राम और उनकी सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताएंगे। आज हम भगवान श्री राम की अयोध्या से नेपाल तक की यात्रा को जानेंगे। साथ ही, कथा के अंत में एक क्विज भी दिया गया है, जिसके विजेता को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही एक लकी विजेता को मिलेगा पत्रिका समूह की ओर से राम मंदिर ट्रिप का मौका। क्विज का लिंक इसी कथा के अंत में दिया गया है।

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Ram Mandir Katha Quiz

भगवान राम और अयोध्या की संस्कृति पर सवालों के दें जवाब और जीतें आकर्षक उपहार

Ram Mandir Katha Quiz 2: राम मंदिर कथा क्विज की इस कड़ी में आज हम आपको राम और उनकी सांस्कृतिक विरासत के बारे में बताएंगे। आज हम भगवान श्री राम की अयोध्या से नेपाल तक की यात्रा को जानेंगे। साथ ही अयोध्या की सांस्कृतिक सीमाओं की भी चर्चा करेंगे। इसी कथा के अंत में आपको पत्रिका समूह की ओर से अगले 100 दिनों तक लगातार आयोजित होने वाले एक क्विज का लिंक मिलेगा, जिसमें आप आज की कथा पर आधारित कुछ सवालों के जवाब दे कर पत्रिका के आधिकारिक सोशल पेज पर फीचर हो सकते हैं। साथ ही इस क्विज के विजेता को एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इतना ही नहीं, इसके अलावा एक लकी विजेता को मिल सकता है पत्रिका समूह की तरफ से राम मंदिर ट्रिप का मौका। आइए, जानते हैं राम की अयोध्या की सांस्कृतिक सीमाओं के बारे में।

अयोध्या में एक जनौरा नामक गांव है। यह वही गांव है, जहां राजा जनक अयोध्या आने पर निवास करते थे और इस गांव को उन्होंने अयोध्या नरेश दशरथ से खरीद लिया था। आज भी इस गांव में गिरिजा कुंड, मंत्रेश्वर महादेव और श्रीसरोवर मौजूद है।

अयोध्या की संस्कृति
अयोध्या की सांस्कृतिक सीमाओं को जानने से पहले अच्छा होगा कि हम संस्कृति के बारे में थोड़ी चर्चा कर लें। वास्तव में संस्कृति किसी भी समाज की परंपराएं, लोकव्यवहार और जीवन शैली का सम्मिलित रुप होती है। अयोध्या की संस्कृति ही भारत की संस्कृति है। विशाल देश में भाषा, रहन-सहन, पूजा और आध्यात्म के बाहरी आवरण अलग हो सकते हैं लेकिन, सभी की अंर्तधारा एक ही है। इसी क्रम में हमे अयोध्या और मिथिला की संस्कृति के संगम को भी समझना चाहिए।

भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की जनकपुर यात्रा ने दोनों संस्कृतियों के बीच पुल का काम किया। इसी यात्रा के दौरान अयोध्या और मिथिला राज्यों के बीच के क्षेत्रों में कुसंस्कृति का विनाश भी हुआ। महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण आतताई शक्तियों के वध के लिए गए थे। इसे लेकर संस्कृत के शोध छात्र रहे आदित्य आनंद कहते हैं कि राक्षसी या आतताई शक्तियां ही थी, जिनका विनाश हुआ। ये शक्तियां संस्कृति को प्रदूषित कर रही थी। आप इसे ऐसे भी कह सकते हैं।

अयोध्या के संत और कथावाचक आचार्य राजेश ठाकुर बताते हैं कि भगवान राम उत्तरप्रदेश की अयोध्या से अंबेदकरनगर, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया पहुंचे। यहां से गंगा नदी पारकर के बिहार के बक्सर, पटना, वैशाली, हाजीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी चंपारण होते हुए नेपाल के जनकपुर पहुंचे थे। जनकपुर में भगवान शिव के पिनाक धनुष को भंग करके जनक की प्रतिज्ञा पूरी की और सीता का स्वयंवर पूरा किया था।

जहं-जहं चरण पड़े रघुवर के…
भगवान श्रीराम पर शोध करने वाले श्रीराम सांस्कृति शोध संस्थान न्यास के डॉ रामअवतार शर्मा की पुस्तक जहं-जहं चरण पड़े रघुवर के में विस्तार से श्रीराम की यात्राओं का उल्लेख किया गया है। वह लिखते हैं कि अयोध्या से 25 किमी दूर श्रृंगी ऋषि का आश्रम था, जहां पर राम ने बला और अतिबला की शिक्षा पाई थी। गाजीपुर में सिदागर घाट पर ऋषियों से मुलाकात किया और बलिया जिले में सरयू तट पर स्थित बैजल लखनेश्वर डीह में लक्ष्मण ने भगवान शिव की स्थापना की। कुछ दूरी पर ही गंगा-सरयू संगम तट पर पहुंचे, जिसे आजकल रामघाट कहा जाता है। बलिया जिले में ही कोरा में भगवान शिव ने कामदेव को भष्म कर दिया था, जिसे कामेश्वर नाथ कहा जाता है।

बलिया और बक्सर के पास चितबड़ागांव में राक्षस सुबाहु का घर था। यहां पर बड़ा सा टीला है जहां वह रहा करता था। श्रीराम ने उसका भी वध किया था। इसके आगे भरोली और उजियार है, जिसके पास जंगलों में ताडक़ा रहा करती थी। ताडक़ा वध के स्थान को ही अब चरित्रवन कहा जाता है। स्त्री की हत्या से भगवान राम दुखी थे और उन्होंने जिस स्थान पर स्नान किया उसे आजकल रामघाट कहा जाता है। इसके बाद श्री राम ने भगवान शिव की उपासना की, जिसे आजकल रामरामेश्वर नाथ कहा जाता है। बिहार के बक्सर जिले में ही एक स्थान अहिरौली है, जिसे अहिल्या स्थल के रुप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार किया था। संस्कृत के शोध छात्र रहे आदित्य आनंद बताते हैं कि बिहार के वैशाली जिले में गंगातट पर राम लक्ष्मण ने विश्राम किया था। और पास में ही मधुबनी जिले में फुलहर गांव है, जहां माता सीता ने गौरी पूजन किया था। और प्रथम बार श्रीराम ने सीता को यहीं पर अपलक देखा था। यहीं पर गिरीजा मंदिर भी है।

बिहार के मधुबनी से कुछ ही दूरी पर बसहिया स्थान है, जानकार बताते हैं कि स्वयंवर के दौरान यहीं पर विवाह मंडप बनाया गया था। यहीं पर ऋषि विश्वामित्र आश्रम भी है और थोड़ी दूरी पर दुधमति नदी है, जिसे पार करके भगवान श्रीराम नेपाल पहुंचे थे। आज भी इस क्षेत्र में भगवान श्रीराम के दुल्हे के रुप में पूजा की जाती है। भगवान शिव का धनुष यहीं पर था जिसे भगवान राम ने तोड़ा था। श्रीराम चरित मानस में इस स्थान को तुलसीदास ने रंगभूमि लिखा है।

बता दें, धनुष टूटने के बाद जो अवशेष गिरे थे, उसे धनुषा मंदिर के रुप में जाना जाता है। जबकि राम और सीता का विवाह जहां पर हुआ वह लक्ष्मीनारायण मंदिर आज भी विद्यमान है। लोक परंपरा में लोग विवाह के अवसर पर यहां की माटी ले जाते हैं जो मंडप में लगाया जाता है। विवाह परंपरा में दहेज दिखाई की रस्म होती है, भगवान श्रीराम को दहेज के रुप में जो कुछ भी मिला उसे रत्न सागर कहा जाता है। विद्याकुंड आज भी मौजूद है जिसे माना जाता है कि यहां पर सीता-राम का आमोद प्रमोद हुआ था। जबकि जिस खेत से सीता प्रगट हुई थी, उस स्थान को सीतामढ़ी कहते हैं। यह नेपाल से सटा हुआ बिहार का सीमांत जिला है। यहां पर अनेक ऋषि-मुनियों के तपस्या का विवरण धर्मग्रंथों में मिलता है। रावण ने ऋषियों के रक्त से भरा घड़ा यही गड़वाया था। जिसके प्रभाव से सीता का उदगम हुआ था।

श्रीराम और भगवान परशुराम की भेंट
पूर्वी चंपारण में वह वेदी वन है, जहां विवाह की रस्म चौथे दिन पूरी की गई थी। जब भगवान श्रीराम की बारात अयोध्या के लिए लौटने लगी तब उसका विश्राम स्थल उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले में डेरवा नामक स्थान पर था। यहीं पर दोहरीघाट में भगवान परशुराम की भेंट श्रीराम से हुई थी। इसके बाद बस्ती जिले में बारात ने विश्राम किया जिसके बाद बारात अयोध्या पहुंंच गई थी।

ऋषि विश्वामित्र प्रथम सांस्कृतिक राजदूत
अयोध्या और मिथिला क्षेत्र की दो संस्कृतियों का मिलन का अद्भुत व्याख्या हमारे विभिन्न धर्मग्रंथों में हैं और ऋषि विश्वामित्र को प्रथम सांस्कृतिक राजदूत कहा जा सकता है। कालक्रम में अयोध्या बार-बार उजड़ती और बसती रही है। हम इसकी भी चर्चा आगे करेंगे। हम यह भी बताएंगे कि किस प्रकार मुगल और ब्रिटीश काल में अयोध्या प्रभावित होती रही है। लेकिन मिथिला ने अपनी संस्कृति को आज भी छाती से लगाकर रखा है, जो हमारी समृद्ध विरासत, संस्कृति और पहचान से जुड़ी है। भारत के गर्भनाल से जुड़ी है…

Note:- पूरी कथा पढ़ने के बाद अब यहां आपको एक क्विज दिया जा रहा है। आपको कथा पर आधारित कुछ प्रश्नो के जवाब देने हैं। इस क्विज में जीतने वाले को पत्रिका डॉट कॉम की तरफ से सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही, उसे 50 लाख से अधिक फॉलोअर वाले पत्रिका उत्तर प्रदेश के सोशल मीडिया पेजेज पर फीचर होने का मौका भी मिलेगा। इसके अलावा एक लकी विजेता को मिलेगा पत्रिका समूह की ओर से राम मंदिर ट्रिप का मौका। राम मंदिर कथा क्विज का आयोजन पत्रिका की तरफ से अगले 100 दिनों तक लगातार किया जाना है। ऐसे में आप रोजाना पत्रिका उत्तर प्रदेश को फॉलो कर क्विज खेल सकते हैं। साथ ही अपने दोस्तों, घर-परिवारवालों और रिश्तेदारों को भी क्विज खेलने को आमंत्रित कर सकते हैं।

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क्विज खेलने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - Play Ram Mandir Katha Quiz
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