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अटल से था इतना प्रेम की छोड़ दी PMO की नौकरी, आखिरी सांस तक निभाते रहे साथ

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को आजमगढ़ से गहरा लगाव था। अटल जी ने अगर किसी के साथ दोस्ती निभाई तो किसी ने उनके लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व सांसद कुसुम राय

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व सांसद कुसुम राय

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आजमगढ़ से गहरा नाता था। उन्होंने अपने सबसे करीबी मित्र महातम राय के साथ आजीवन दोस्ती निभाई। उन्होंने महातम राय की पुत्री कुसुम राय को राजनीति में शून्य से शिखर तक पहुंचाने महत्पवूर्ण भूमिका निभाई। वहीं इसी जिले के जय प्रकाश मौर्य ने अपना पूरा जीवन अटल जी को समर्पित कर दिया। अंतिम सांस तक उनके साथ रहे।

अटल जी ने तीन बार किया आजमगढ़ का दौरा
अटल जी ने अपने राजनीतिक जीवन में तीन बार आजमगढ़ की यात्रा की थी। एक बार वर्ष 1977 में और फिर 1984-85 में। वर्ष 1996 की अटल की यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जाती है। वह रैली अब तक किसी नेता की सबसे बड़ी रैली थी।


अटल जी की बात सुनकर गूंज उठा था ठहाका
वर्ष 1996 में अटल जी की जजी मैदान में सभा थी। वे वाराणसी से कार से आजमगढ़ आए थे। अटल जी वर्षों बाद किसी रैली में घंटों देरी से पहुंचे थे। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी को देखने के लिए दलीय सीमा टूटी थी। पूरे आजमगढ़ शहर में तिल रखने की जगह नहीं थी।

अटल जी ने अपने भाषण में कहा था कि उनकी उम्र बढ़ गयी है। वाराणसी से आजमगढ़ आते हुए यह नहीं समझ पाए कि सड़क गड्ढे में है या गड्ढे में सड़क। अटल जी का यह जुमला आज भी लोगों की जुबान पर है। अटल जी को स्वर्णिंम चतुर्भुज योजना की प्रेरणा यहीं से मिली थी। इस बात को उन्होंने खुद स्वीकार किया था।


महातम राय थे उनके सबसे करीबी दोस्त
अटल जी के आजमगढ़ से संबंध की बात करें तो महातम राय उनके सबसे करीबी मित्र थे। मानपुर बिलरियागंज निवासी महातम राय और अटल जी ने एक साथ आरएसएस में काम शुरू किया था।


महातम के निधन के बाद निभाई थी दोस्ती
महातम राय के निधन के बाद अटल जी ने दोस्ती निभायी थी। स्व. महातम राय की पुत्री कुसुम राय को राजनीति में शून्य से शिखर तक पहुंचाया था। कुसुम राय बीजेपी में विभिन्न पदों पर काम की। उन्हें राज्यसभा भी भेजा गया।


जय प्रकाश मौर्य ने आजीवन की सेवा
आजमपुर गांव निवासी जय प्रकाश मौर्य को कम ही लोग जानते हैं। जय प्रकाश मौर्य नेता नहीं हैं लेकिन अटल जी के सुख दुख के साथी रहे। उन्होंने आजीवन अटल जी की सेवा की। अटल जी के समय ही उन्हें पीएमओ में नौकरी भी मिली थी। जब अटल जी बीमार हुए तो जयप्रकाश ने नौकरी की परवाह नहीं की। वे हमेशा के लिए अटल जी केे साथ रहने लगे।

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यहां तक कि अटल जी की बीमारी के दौरान वे कभी अपने घर भी नहीं आए। अंतिम सांस तक अटल जी की सेवा की। जयप्रकाश का मानना है कि अटल जी जैसी शख्सियत मिलनी मुश्किल है। वे अच्छे नेता के साथ एक अच्छे इंसान भी थे। वे अपनों को कभी नहीं भूलते थे।